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नियमित कर्मचारियों के बराबर इन कर्मियों को हो भुगतान- बोला कोर्ट

7th Pay Commission: जज के मुताबिक, नागरिक निकाय से एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सबसे कमजोर वर्गों को रोजगार देते समय उनकी रक्षा करने की उम्मीद की जाती है और यह उनके श्रम का शोषण नहीं कर सकता है।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः unsplash.com)

मद्रास हाईकोर्ट ने ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (Greater Chennai Corporation) को राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (National Urban Livelihood Mission : NULM) योजना के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित वेतनमान या वेतन पर लाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट की टिप्पणी उन कर्मचारियों के संदर्भ में है, जिन्हें लंबे समय तक लगातार काम पर रखा गया है। अदालत ने आगे कहा कि ऐसे लोगों की तनख्वाह तर्कसंगत, उचित और न्यायसंगत होनी चाहिए।

दरअसल, सोमवार (24 जनवरी, 2022) को जस्टिस वी पथिबन की सिंगल बेंच ने कहा कि योजना तैयार करते समय अफसरों को इन लोगों से लिए जा रहे काम और नियमित कर्मचारियों को समान काम के लिए भुगतान किए जाने वाले वेतन को भी ध्यान में रखना होगा।

जज आगे बोले कि निगम एक व्यवहारिक योजना तैयार करते हुए 12 हफ्ते में उचित आदेश पारित करेगा। कोर्ट के अनुसार, रखरखाव/सफाई कार्मिकों को सरकार की ओर से तय न्यूनतम पारिश्रमिक दिया जाए।

जज के मुताबिक, नागरिक निकाय से एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सबसे कमजोर वर्गों को रोजगार देते समय उनकी रक्षा करने की उम्मीद की जाती है और यह उनके श्रम का शोषण नहीं कर सकता है।

जज उजईपोर उरीमाई इयक्कम की ओर से इसके अध्यक्ष के. भारती द्वारा दायर एक रिट याचिका का निस्तारण कर रहे थे। याचिकाकर्ता-संघ के सदस्य एनयूएलएम में कई साल से लगातार काम कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता-संघ का कहना है कि एनयूएलएम कर्मचारी सालों से एक साथ काम कर रहे हैं। पर दुर्भाग्य है कि उन्हें राज्य सरकार की ओर से नियमित आधार पर रखे गए ऐसे सफाईकर्मियों/स्वच्छता कर्मचारियों पर लागू न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।

आगे बताया गया कि 1 अप्रैल, 2019 तक एनयूएलएम कर्मियों को निगम ने प्रतिदिन केवल 391 रुपए का पेमेंट किया है, जबकि स्थाई प्रतिष्ठान में समान सफाई कर्मचारी को 13,000 रुपए का मूल वेतन दिया जा रहा है। साथ ही 4,023 रुपए का डीए जुड़ने के बाद प्रति महीने कुल 17,023 रुपए का भुगतान किया जा रहा है।

जज ने यह भी कहा कि एक आदर्श काम या नौकरी देने वाले के तौर पर नागरिक निकाय से सबसे कमजोर तबकों को रोजगार मुहैया कराते वक्त उनकी रक्षा करने की उम्मीद की जाती है। वह उनके श्रम का शोषण नहीं कर सकते।

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