7th Pay Commission: पदोन्नति सहित विभिन्न मांगों को लेकर इन कर्मियों के परिवार वालों का प्रदर्शन, यहां भी 40 दिन से हड़ताल जारी

7th Pay Commission: हालांकि, शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तारकेश्वर पटेल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और लाठीचार्ज के आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐहतियाती उपाय के तहत प्रदर्शनकारियों को यहां ‘धरनास्थल’ भेजा गया था, लेकिन वे सप्रे स्कूल में एकत्र हो गए।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः pixabay.com)

7th Pay Commission: छत्तीसगढ़ में तैनात पुलिस कर्मियों के परिवार के सदस्यों ने कर्मियों को पदोन्नति, साप्ताहिक अवकाश समेत अन्य मांगों को लेकर सोमवार (छह दिसंबर, 2021) को रायपुर में प्रदर्शन किया। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात सहायक आरक्षकों की समय पर पदोन्नति, वेतन से जुड़ी अनियमितताएं दूर करने, अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नियम लागू करने तथा साप्ताहिक अवकाश की मांगों लेकर उनके परिवार के सदस्यों ने आज प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि अपनी मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों के परिवार के सदस्य नवा रायपुर में एकत्र हुए और पुलिस मुख्यालय तथा मंत्रालय का घेराव करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि हालांकि इससे पहले ही आंदोलनकारियों को रोक लिया गया और उन्हें रायपुर शहर के सप्रे शाल मैदान में भेजा गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान बल प्रयोग भी किया गया जिससे कुछ व्यक्तियों को चोटें आयीं।

हालांकि, शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तारकेश्वर पटेल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और लाठीचार्ज के आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ऐहतियाती उपाय के तहत प्रदर्शनकारियों को यहां ‘धरनास्थल’ भेजा गया था, लेकिन वे सप्रे स्कूल में एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सहायक आरक्षक नक्सलियों के निशाने पर रहते हैं लेकिन पदोन्नति और अन्य सुविधाएं संबंधित क्षेत्रों के प्रभारी को दे दी जाती है। पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा इसी तरह का प्रदर्शन जून, 2018 में भी किया गया था, जब राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस विपक्ष में थी।

इस बीच, महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के कर्मचारियों की हड़ताल सोमवार को 40वें दिन भी जारी रही। वहीं, राज्य के 250 डिपो में से 105 में बस परिचालन सेवा बहाल हो गयी और लगभग 19,000 कर्मचारी ड्यूटी पर लौट गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एमएसआरटीसी की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, घाटे में चल रहे निगम के राज्य सरकार के साथ विलय की मांग के लिए आहत हड़ताल के बीच लगभग 19,000 कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी पर लौटने के बाद तीन दिसंबर को 49 के मुकाबले सोमवार को राज्य भर में 105 डिपो पर बसों का संचालन शुरू हो गया।

राज्य द्वारा संचालित परिवहन निकाय में कुल 92,266 कर्मचारी हैं। इसका मतलब है कि 73,000 से अधिक कर्मचारी अभी भी सरकार के साथ निगम के विलय की अपनी एकमात्र मांग को लेकर हड़ताल पर हैं, जो राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह बेहतर और समय पर वेतन सुनिश्चित करेगा। विज्ञप्ति में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि रविवार को निगम ने राज्य भर में विभिन्न मार्गों पर लगभग 735 बसों के साथ सेवाओं का संचालन किया और इस दौरान बसों में 1.04 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया।

निगम ने सोमवार को मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर और धारूर में डिपो से बाहर जाने वाली बसों की आवाजाही में बाधा डालने के आरोप में एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करवाई। एमएसआरटीसी के ज्यादातर कर्मचारी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और वह निगम के राज्य सरकार में विलय की मांग पर अड़े हुए हैं। कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर को हड़ताल शुरू की थी और पिछले महीने अपनी हड़ताल तेज कर दी। तब से ज्यादातर बस डिपो बंद हैं जिससे यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

एमएसआरटीसी के अधिकारियों के अनुसार राज्य के स्वामित्व वाले निगम ने हड़ताल के कारण अब तक 9,625 स्थायी कर्मचारियों को और 1,990 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को निलंबित किया है। बता दें कि एमएसआरटीसी लगभग 16,000 बसों के बेड़े के साथ देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन निकायों में से एक है।

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