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लोन चुकाने में सक्षम कर्जदारों से भी नहीं हो पा रही वसूली, ढाई साल में दोगुना हुआ बकाया

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने सरकारी बैंकों में एनपीए में कमी आने की बात कही है। वहीं, वित्‍त राज्‍यमंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला ने लोकसभा में दिए एक लिखित बयान में बताया कि सिर्फ विलफुल डिफॉल्‍टर्स पर ही बकाया राशि 30 सितंबर, 2018 तक तकरीबन 1.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: January 8, 2019 4:43 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 7 जनवरी को जोखिम वाले कर्ज (NPA) को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्‍होंने कहा था कि खासकर सरकारी क्षेत्र के बैंकों में एनपीए में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। आरबीआई गवर्नर के बयान से कुछ दिनों पहले ही वित्‍त राज्‍यमंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला ने विलफुल डिफॉल्‍टर को लेकर लोकसभा में दिलचस्‍प जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, पिछले 30 महीनों में विलफुल डिफॉल्टर्स पर कुल बकाया राशि तकरीबन दोगुना हो चुकी है। 30 सितंबर, 2018 तक ऐसे बकाएदारों पर 1.47 लाख करोड़ रुपया बकाया था। यहां यह गौर करने वाली बात है कि इनमें सिर्फ सरकारी बैंकों का ही हवाला दिया गया है। ढाई साल पहले के मुकाबले यह 92 फीसद ज्‍यादा है। आरबीआई द्वारा तय मानक के अनुसार, उन बकाएदारों को विलफुल डिफॉल्‍टर माना जाता है जो लोन लौटाने में सक्षम हैं, लेकिन जानबूझकर तय समय पर कर्ज नहीं चुकाते हैं। मोदी सरकार ने नियमों में बदलाव कर विलफुल डिफॉल्‍टर्स को जनहित में वित्‍तीय आर्थिक तौर पर खतरा घोषित कर चुकी है।

SBI और PNB को सबसे ज्‍यादा नुकसान: सार्वजनिक क्षेत्र के दो सबसे बड़े बैंकों को विलफुल डिफॉल्‍टर्स के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। 30 सितंबर, 2018 तक स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया का कुल 37,250 करोड़ रुपया फंसा हुआ था। 31 मार्च, 2018 को यह आंकड़ा 34,436 करोड़ रुपए था। घोटालों से त्रस्‍त पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का भी हजारों करोड़ रुपया फंसा हुआ है। मार्च से सितंबर 2018 के बीच भी पीनएबी को तगड़ा झटका लगा है। 30 सितंबर, 2018 तक पीएनबी का विलफुल डिफॉल्‍टर्स पर कुल 23,469 करोड़ रुपए बकाया था। 31 मार्च, 2018 को यह आंकड़ा 15,190 करोड़ रुपया था। विलफुल डिफॉल्‍टर्स बैंक ऑफ इंडिया का भी हजारों करोड़ रुपया दबाए बैठे हैं। बीओआई का अभी भी 10,207 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। 31 मार्च, 2018 तक इस बैंक का 7,463 करोड़ रुपया फंसा हुआ था। इन तीन बैंकों के अलावा आईडीबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, विजया बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक का भी हजारों करोड़ रुपया फंसा हुआ है। बता दें कि इस लिस्‍ट में सार्वजनिक क्षेत्र के शीर्ष 10 बैंकों को ही शामिल किया गया है। इनके अलावा अन्‍य सरकारी बैंकों का पैसा भी विलफुल डिफॉल्‍टर्स दबाए बैठे हैं।

बैंकिंग सेक्‍टर में सुधार की कवायद: वित्‍त राज्‍यमंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला द्वारा संसद में आंकड़ा मुहैया कराने के बाद आरबीआई गवर्नर एनपीए को लेकर महत्‍वपूर्ण बयान दिया है। शक्तिकांत दास ने बताया कि बैड लोन से दबे सरकारी बैंकों में इसका स्‍तर लगातार कम हो रहा है। मार्च 2018 में सरकारी बैंकों पर कुल 9.62 लाख करोड़ रुपए का एनपीए था। हाल में सरकार की ओर से उठाए गए कदम के बाद इसमें 23,000 करोड़ रुपए तक की कमी दर्ज की गई है। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि बैंकिंग सेक्‍टर में सुधार के लिए विभिन्‍न पक्षकारों के साथ सलाह-मशविरे की पहल की गई है। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों में बैंकों का कर्जा लेकर कई उद्योगपति फरार हो चुके हैं। इसके बाद सरकार के साथ आरबीआई भी सतर्कता बरत रहा है।

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