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रिसर्च का दावा, देर से प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं की बेटियों में होता है बांझपन का खतरा

एक ताजा अध्ययन ने यह दावा किया है कि जो महिलाएं ज्यादा उम्र में बच्चे को जन्म देती हैं और जन्म लेने वाली अगर बच्ची होती है तो उसकी प्रजनन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचता है।

Author December 18, 2017 10:47 PM
प्रतीकात्मक चित्र

पहले के मुकाबले आजकल महिलाएं ज्यादा उम्र में मां बन रही हैं। इसका प्रमुख कारण आजकल की जीवनशैली है। पहले कम उम्र में ही शादी हो जाने की वजह से महिलाएं जल्दी गर्भवती हो जाती थीं। अब ऐसा नहीं होता। एक ताजा अध्ययन ने यह दावा किया है कि जो महिलाएं ज्यादा उम्र में बच्चे को जन्म देती हैं और जन्म लेने वाली अगर बच्ची होती है तो उसकी प्रजनन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि उम्र बढ़ने के साथ साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता घटती है क्योंकि उम्र के साथ महिलाओं के अंडों में आनुवंशिक दोष इकट्ठा होता जाता है।

द गार्डियन की एक रिपोर्ट में यह अध्ययन प्रकाशित किया गया है। रिसर्च से जुड़े शोधकर्ता पीटर नैगी ने बताया कि मां के प्रजनन की उम्र न सिर्फ उसके खुद के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह उसकी बेटी की प्रजनन क्षमता को प्रभावित भी करती है। ऐसे में बेटियों के बांढ होने का भी खतरा रहता है। उन्होंने आगे बताया कि अगर महिला 40 या उसके आसपास की उम्र में गर्भवती होती है तो इस दौरान उसकी बेटी में बांझपन का खतरा ज्यादा रहता है। रिपोर्ट के मुताबिक उम्र के साथ महिलाओं के अंडों में बढ़ने वाला आनुवंशिक दोष महिला से उनकी बेटियों में पहुंच जाता है जिससे उनके अंडे की क्वालिटी भी कमजोर होती है। ऐसे में बेटियों की प्रजनन क्षमता पर पिता की उम्र का कोई प्रभाव नहीं देखने को मिलता है।

रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन की वह अवस्था होती है जब उनमें अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया लगभग बंद हो जाती है। महिलाएं जब 50 की उम्र में पहुंचती हैं तब उनमें प्रजनन की नगण्य क्षमता होती है। ऐसे में मीनोपॉज यानी कि रजोनिवृत्ति के आसपास बच्चे को जन्म देने वाली महिलाएं अगर बच्ची को जन्म देती हैं तो उसके बांझपन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अमेरिका के न्यू ओरलींस स्थित अमेरिकन सोसाइटी ऑफ रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के रिसर्च में इस बात का दावा किया गया था।


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