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राष्ट्रगान पर नहीं खड़ी हुई 9 साल की लड़की तो फूटा नेताओं का गुस्सा

हार्पर नीलसन ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि 'जब ये कहा जाता है कि हम जवान हैं तो हम उन मूल निवासियों को भुला देते हैं जो 50 हजार साल पहले देश में रहते थे। ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी कुल आबादी का महज 2% हैं।'

हार्पर नीलसन, फोटो सोर्स, (ट्विटर, @peterwmurphy1)

ऑस्ट्रेलिया में 9 साल की एक बच्ची यहां के बड़े-बड़े सियासी नेताओं के निशाने पर है। इस बच्ची का नाम हार्पर नीलसन है। इस बच्ची ने राष्ट्रगान बजने पर खड़ा होने से इनकार कर दिया। जिसके बाद इस बच्ची पर नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। इस बच्ची का कहना है कि एडवांस ऑस्ट्रेलिया फेयर टाइटल वाले राष्ट्रगान में कहा जाता है कि सभी ऑस्ट्रेलियाई खुशी मनाएं क्योंकि हम जवान और आजाद हैं। जबकि एडवांस का मतलब तो श्वेत ऑस्ट्रेलियाई लोगों से है।

हार्पर केनमोर साउथ स्टेट स्कूल में पढ़ती है और राष्ट्रगान को गाने से इनकार करने के बाद स्कूल प्रशासन ने भी उसका विरोध किया है। न्यूज 9 से बातचीत करते हुए बच्ची के परिजनों ने कहा है कि स्कूल की तरफ से धमकी दी गई है कि अगर उसने राष्ट्रगान के वक्त खड़े होने से इनकार किया तो स्कूल से उसे सस्पेंड कर दिया जाएगा। हालांकि स्कूल प्रशासन अब ऐसी धमकियां देने की बातों से इनकार कर रहा है।

हार्पर नीलसन ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि ‘जब ये कहा जाता है कि हम जवान हैं तो हम उन मूल निवासियों को भुला देते हैं जो 50 हजार साल पहले देश में रहते थे। ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी कुल आबादी का महज 2% हैं।’ इधर बच्ची के पिता मार्क नीलसन ने कहा है कि उनकी बेटी काफी बहादुर है।

बच्ची के राष्ट्रगान में खड़ा ना होने के फैसले पर अब यहां सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री टोनी अबॉट ने कहा है कि राष्ट्रगान के वक्त खड़ा होना अच्छी तहजीब को दिखाता है। वहीं दक्षिणपंथी सीनेटर पॉलीन हेन्सन ने इस मामले में कहा है कि स्कूलों में बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। मुझे उसे लात मारना है। क्वींसलैंड पार्लियामेंट के सदस्य जैरोड ब्लेजी ने कहा है कि बच्ची के माता-पिता उसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने बच्ची के माता-पिता से इस विरोध को रोकने के लिए कहा है। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि राष्ट्रगान के वक्त खड़े होने का विरोध करना देश के प्रति असम्मान जताना है। इधर क्वींसलैंड डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन ने कहा है कि प्रबंधन देश में लोगों के अलग-अलग नजरियों का सपोर्ट करता है। लेकिन विभाग ने इस बात से इनकार कर दिया है कि बच्ची को स्कूल से निकाले के लिए किसी तरह की धमकी दी गई है।

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