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निगम उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने शुरू किया मंथन

चुनावी रणनीति पर मंथन करने के लिए सोमवार को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार के साथ पार्टी के पदाधिकारियों, संबंधित जिले के अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्ष, निगम के नेताओं, चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों को बुलाया गया था। सोमवार दोपहर बाद अध्यक्ष ने सभी के साथ उपचुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की। इसके साथ ही दिल्ली छावनी बोर्ड के भी आठ सीटों पर चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है।

Author नई दिल्ली | November 24, 2020 6:38 AM
corporationकांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी एक बैठक में। फाइल फोटो।

निर्भय कुमार पांडेय

पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली नगर निगम की खाली पड़ी पांच सीटों पर उपचुनाव हो सकते हैं। इन सीटों पर उपचुनाव होने की संभावना इस वजह से भी जताई जा रही है कि तीनों निगम का कार्यकाल करीब डेढ़ से दो साल का बचा है। लंबा वक्त बचा होना इसका मुख्य कारण माना जा रहा हैै। कोरोना की वजह से भले ही इसको लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है पर दिल्ली कांग्रेस ने निगम चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है।

चुनावी रणनीति पर मंथन करने के लिए सोमवार को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार के साथ पार्टी के पदाधिकारियों, संबंधित जिले के अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्ष, निगम के नेताओं, चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों को बुलाया गया था। सोमवार दोपहर बाद अध्यक्ष ने सभी के साथ उपचुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की। इसके साथ ही दिल्ली छावनी बोर्ड के भी आठ सीटों पर चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है।

पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि वार्ड नंबर-62 शालीमार बाग और वार्ड नंबर 32 रोहिणी सी, उत्तरी दिल्ली नगर निगम की सीटें खाली हैं। इसी प्रकार से पूर्वी दिल्ली नगर निगम की वार्ड नंबर 41 चौहान बांगर, 02 त्रिलोकपुरी और 08 कल्याणपुरी की सीटें खाली हैं। वहीं, तीनों नगर निगम का कार्यकाल अभी काफी बचा है। दिल्ली में कोरोना का प्रकोप भी है। ऐसे में माना जा रहा है कि लंबे वक्त तक यह सीटें खाली नहीं रहे। इसके लिए उपचुनाव हो सकते हैं।

कोरोना काल में यदि चुनाव होता है तो इसको लेकर कांग्रेस किस रणनीति के तहत चुनाव लड़ेगी इसके लिए सोमवार को पार्टी के पदाधिकारियों के अलावा इलाके के नेताओं के साथ प्रदेश अध्यक्ष की लंबी बैठकों का दौर चला। कांग्रेस दिल्ली में फिलहाल तीसरे नंबर की पार्टी है। ऐसे में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर निगम चुनाव को देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने विधानसभा चुनावों में अनुकूल परिणाम नहीं आने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब माना जा रहा है कि यह चौधरी के लिए पहली और बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल दिल्ली की महिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही युवा हैं। इस कारण माना जा रहा है कि निगम में भी युवा चेहरों पर पार्टी दांव खेल सकती हैं। एक प्रदेश उपाध्यक्ष ने बताया कि कोरोना काल में पार्टी के पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में जिस प्रकार समाज में कार्य किया है। उससे तो उम्मीद है कि यदि उपचुनाव हुए तो पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होगा।

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