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संसद में हंगामे की भेंट चढ़ा राज्यसभा का 236 वां सत्र

ललित मोदी प्रकरण एवं व्यापमं घोटाले पर कांग्रेस सहित विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ा राज्यसभा का 236वां सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया तथा सत्र के दौरान महज नौ घंटे से कुछ अधिक समय तक ही कामकाज हो पाया। सभापति हामिद अंसारी ने दोपहर बारह बजे सत्र को अनिश्चित काल के […]

Author August 14, 2015 12:00 AM

ललित मोदी प्रकरण एवं व्यापमं घोटाले पर कांग्रेस सहित विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ा राज्यसभा का 236वां सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया तथा सत्र के दौरान महज नौ घंटे से कुछ अधिक समय तक ही कामकाज हो पाया। सभापति हामिद अंसारी ने दोपहर बारह बजे सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। सत्र के अंत में दिया जाना सभापति का पारंपरिक संबोधन भी नहीं हुआ।

इक्कीस जुलाई को शुरू हुए इस सत्र में नौ घंटे से कुछ अधिक समय ही कामकाज हो पाया। सदन की बैठकों का अधिकतर समय ललित मोदी प्रकरण एवं व्यापमं घोटाले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तथा राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांगे्रस एवं अन्य विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया।

उच्च सदन में इस दौरान आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग, लोकसभा में 25 कांगे्रस सदस्यों के पांच दिन के निलंबन, पूर्वोत्तर क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों से कथित रूप से विचार विमर्श किए बिना नगालैंड समझौता किए जाने तथा बिहार सरकार से चर्चा किए बिना राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति के मुद्दे पर भी अलग अलग अवसरों पर विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। लगभग पूरे सत्र में गतिरोध बने रहने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने एक दूसरे पर समाधान नहीं निकालने के आरोप लगाए।

सत्र में विधायी कामकाज के नाम पर रेलवे और सामान्य अनुदान की अनुपूरक मांगों और इससे संबंधित दो विनियोग विधेयकों को बिना चर्चा के लोकसभा को लौटाया गया। इस दौरान सरकार ने तीन अन्य विधेयक को वापस लिया। सत्र के दौरान कोई गैर सरकारी कामकाज भी नहीं हुआ। इस दौरान महज छह मौखिक सवालों के जवाब दिए जा सके। हंगामे के बीच ही सरकार ने 27 जुलाई को गुरदासपुर में हुए आतंकवादी हमले, पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले तथा मध्य प्रदेश में हरदा के समीप हुए रेल हादसे सहित विभिन्न मुद्दों पर बयान दिए।

झारखंड से उपचुनाव में निर्वाचित होकर आये भाजपा के एमजे अकबर को जहां सत्र के दौरान उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलायी गई वहीं आगामी कुछ महीनों में कार्यकाल पूरा करने जा रहे तीन सदस्यों को विदाई दी गई। इनमें मनोनीत सदस्य एच के दुआ एवं अशोक गांगुली तथा अन्नाद्रमुक के पी कन्नन शामिल हैं। सत्र के दौरान पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और वर्तमान सदस्य कल्पतरू दास तथा नौ पूर्व सदस्यों के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कलाम और दास के सम्मान में सदन की बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित किया गया।

इससे पहले सुबह राज्यसभा की बैठक शुरू होते ही सभापति हामिद अंसारी ने तीन सदस्यों अशोक गांगुली, एचके दुआ और पी कन्नन का कार्यकाल अगले कुछ महीनों में पूरा होने का जिक्र किया। अशोक गांगुली और एचके दुआ जहां मनोनीत सदस्य हैं वहीं अन्नाद्रमुक के कन्नन उच्च सदन में पुडुचेरी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अंसारी ने इन सदस्यों के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होेंने सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लिया और उन्होंने सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा में निश्चित तौर पर संवृद्धि की।

इस मौके पर गांगुली और दुआ ने अपने छह साल के अनुभवों का जिक्र करते हुए सदन के कई उतार-चढ़ाव वाले क्षणों को याद किया। उन्होंने सहयोगात्मक संघवाद में राज्यसभा की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने सदन में हुई कई उच्चस्तीय चर्चाओं का भी जिक्र किया। दुआ ने सदन की कार्यवाही में होने वाले व्यवधान पर अफसोस जताते हुए कहा कि इससे सदन की छवि खराब होती है। उन्होंने सदन चलाने में दोनों पक्षों सरकार और विपक्ष की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि सदन चलाने को लेकर आम सहमति होनी चाहिए।

इसके बाद उपसभापति पीजे कुरियन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और करीब साढ़े 11 बजे बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बारह बजे बैठक शुरू होने पर सभापति अंसारी ने कार्यवाही शुरू होते ही वंदे मातरम की धुन बजाने को कहा और उसके फौरन बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

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