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कंधार विमान अपहरण का मुद्दा उठाकर सोनिया-मनमोहन के विवेक पर सवाल उठा रहे हैं राहुलः अमित शाह

भाजपा अध्यक्ष कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘आज कांग्रेस और राहुल गांधी उस घटना पर सवाल उठाकर न सिर्फ असंवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं बल्कि अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विवेक पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।’’

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार (15 मार्च) को कहा कि विमान अपहरण के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मसूद अजहर को क्यों छोड़ा, यह पूछकर कांग्रेस एवं राहुल गांधी न सिर्फ ‘असंवेदनशीलता’का परिचय दे रहे हैं बल्कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह जैसे अपने नेताओं के विवेक पर प्रश्नचिन्ह भी लगा रहे हैं। अमित शाह ने अपने ब्लॉग में लिखा कि क्या कांग्रेस को नहीं पता कि जब विमान अपहरण की वह आतंकी वारदात हुई तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस विषय पर चर्चा के लिए एक ‘सर्वदलीय बैठक’बुलाई थी ?

उस बैठक में कांग्रेस की तरफ से स्वयं तब की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह मौजूद थे। उन्होंने लिखा कि देश के मानस को स्वीकारते हुए तथा विमान में फंसे लोगों के जीवन की रक्षा को प्राथमिकता मानते हुए सभी राजनीतिक दलों की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया कि विमान में फंसे लोगों की जिंदगी हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण है। शाह ने कहा कि इसीलिए सभी दलों ने सर्वसम्मति से मसूद अजहर को सौंपने तथा अपने लोगों को वापस लाने का प्रस्ताव स्वीकार किया।

भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर लगाया आरोपः भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘आज कांग्रेस और राहुल गांधी उस घटना पर सवाल उठाकर न सिर्फ असंवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं बल्कि अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विवेक पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।’’गौरतलब है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में चीन के वीटो के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार (14 मार्च) को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से डरे हुए हैं।

राहुल ने ट्वीट कर दावा किया था, ”मोदी की चीन कूटनीति गुजरात में शी के साथ झूला झूलने, दिल्ली में शी को गले लगाने, चीन में शी के आगे घुटने टेकने की रही”। बहरहाल, अमित शाह ने जोर दिया कि मसूद अजहर को छोड़ने का फैसला किसी‘गुडविल जेस्चर’ के तौर पर नहीं गया था और इसकी पुष्टि उस समय के विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने अपने साक्षात्कार में की थी, जिनके पुत्र अब कांग्रेस में हैं। अमित शाह ने आरोप लगाया कि इस गैर-जरूरी मुद्दे को उठाकार कांग्रेस ने इतिहास में हुई ऐसी रिहाइयों पर बहस छेड़ दी है, जो खुद कांग्रेस के ऊपर सवाल खड़े करने वाले हैं तथा यह सूची बड़ी है, जिसपर चर्चा हो तो कांग्रेस का दामन दागदार नजर आएगा उन्होंने जोर दिया कि कंधार विमान अपहरण घटना से दस साल पहले देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का कश्मीर के घाटी क्षेत्र में आतंकियों ने अपहरण कर लिया और इसके बदले उन्होंने 10 आतंकियों को छोड़ने की मांग की थी

मसूद अजहर को छोड़ना नहीं था ‘गुडविल जेस्चर’ः शाह ने कहा कि सरकार ने उस मांग को स्वीकार किया और आतंकियों की रिहाई की गई और यह भी ‘गुडविल जेस्चर’नहीं था उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस पार्टी को यह बताना चाहिए कि 2010 में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब 28 मई को 25 खतरनाक आतंकियों को क्यों छोड़ा गया ? भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीति हमेशा आतंकवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद को लेकर ढुलमुल रही है। एक साक्षात्कार का हवाला देते हुए शाह ने जोर दिया कि खुद कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने यह स्वीकार किया है कि मनमोहन सिंह की आतंकवाद पर नीति मोदी सरकार की सख्त नीतियों की तुलना में ढीली थी। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर चीन के अड़ंगे के संदर्भ में कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू द्वारा मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र से पता चलता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का विषय जब आया तब पंडित नेहरू ने ‘पहले चीन’ की नीति पर चलते हुए यह अवसर चीन के हाथों में दे दिया था।

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