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‘आतंकी पर दया करने के बाद खुद को देशभक्‍त न कहें’, नसीरुद्दीन शाह को योगेश्‍वर का जवाब

योगेश्वर दत्त ने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए लिखा कि "एक आतंकवादी संगठन ने भारत और बांग्लादेश के नागरिकों का अपहरण कर लिया और बाद में बांग्लादेशियों का धर्म देखकर छोड़ दिया।"

योगेश्वर दत्त ने नसीरुद्दीन शाह के बयान से जतायी नाराजगी। (file pic)

मशहूर फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा देश में बढ़ रही हिंसा और असहिष्णुता पर दिए गए बयान पर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने ट्वीट कर नसीरुद्दीन शाह के बयान की आलोचना की है। बता दें कि नसीरुद्दीन शाह ने एक बयान में कहा था कि देश के मौजूदा माहौल में उन्हें डर लगता है क्योंकि आज देश में गाय एक पुलिस इंस्पेक्टर से ज्यादा अहम हो गई है। नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों को लेकर चिंता होती है। नसीरुद्दीन शाह के इस बयान को बुलंदशहर में हुई हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां गोहत्या के आरोप में भड़की हिंसा में एक पुलिस इंस्पेक्टर समेत 2 लोगों की मौत हो गई थी। नसीरुद्दीन शाह के बयान ने राजनैतिक रंग ले लिया है। जिसमें दक्षिणपंथी संगठन जहां नसीरुद्दीन शाह के बयान की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने नसीरुद्दीन शाह के बयान का समर्थन किया है।

बयान को लेकर जारी विवाद के बीच अब योगेश्वर दत्त ने भी अपनी बात रखते हुए नसीरुद्दीन शाह के बयान के प्रति नाराजगी जाहिर की और सवाल किया कि जब 1984 दंगे, 1993 बम धमाके और 26/11 जैसे हमले हुए थे तब उन्हें डर नहीं लगा था? योगेश्वर दत्त ने शुक्रवार को ट्वीट कर नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए लिखा कि “एक आतंकवादी संगठन ने भारत और बांग्लादेश के नागरिकों का अपहरण कर लिया और बाद में बांग्लादेशियों का धर्म देखकर छोड़ दिया, बाकी के सभी 39 भारतीयों को मार दिया। तब आपको गुस्सा नहीं आया? आतंकी याकूब मेमन की फांसी की दया याचिका पर साइन करते हुए आपको डर नहीं लगा?” बता दें कि मुंबई बम धमाके के मामले में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन की फांसी की दया याचिका पर कई हस्तियों ने साइन कर उसकी फांसी रुकवाने की अपील की थी। इन लोगों में नसीरुद्दीन शाह भी शामिल थे।

एक अन्य ट्वीट में योगेश्वर दत्त ने लिखा कि “बुलंदशहर की घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई, उसका हम सब को बहुत खेद है, पर इससे पहले भी ना जाने कितने दंगे हुए और मासूमों की जान गई, तब आपको डर नहीं लगा? इससे ही समझ आता है कि आप किसकी तरफ है। कृप्या आतंकी पर दया करने के बाद खुद को देशभक्त ना कहें।” नसीरुद्दीन शाह के बयान के विरोध में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने शुक्रवार को अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल में भी हंगामा किया। जिसके चलते आयोजकों को नसीरुद्दीन शाह का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।

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