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खिलाड़‍ियों की आय पर टैक्‍स? ट्विटर पर भिड़ गए पहलवान योगेश्‍वर दत्‍त और IAS अशोक खेमका

पहलवान योगेश्‍वर दत्‍त ने खेल के पतन के लिए खेमका को जिम्‍मेदार ठहराते हुए इस फैसले को तुगलकी फरमान बताया था। जिसके जवाब में खेमका ने उन्‍हें भाषा की शिष्‍टता बनाए रखने की ताकीद की।

हरियाणा के खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि और विज्ञापनों से मिलने वाले पैसों का एक-तिहाई हिस्सा हरियाणा खेल परिषद को देने के फैसले पर हरियाणा सरकार ने अगला आदेश आने तक रोक लगा दी है। (Photo: Express Archive)

हरियाणा के सभी खिलाड़ियों से पेशेवर समारोह से मिलने वाली पुरस्कार राशि और विज्ञापनों से मिलने वाली रकम का एक-तिहाई हिस्सा के नोटिफिकेशन पर विवाद हो गया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका द्वारा जारी एक सूचना में यह जानकारी मिली थी। चारों तरफ से आलोचना होते देख हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने इस फैसले पर अगला आदेश आने तक रोक लगा दी है। हालांकि ट्विटर पर हरियाणा के खिलाड़‍ियों का गुस्‍सा फूटा, जिसके शिकार खेमका हुए। पहलवान योगेश्‍वर दत्‍त ने खेल के पतन के लिए खेमका को जिम्‍मेदार ठहराते हुए इस फैसले को तुगलकी फरमान बताया था। जिसके जवाब में खेमका ने उन्‍हें भाषा की शिष्‍टता बनाए रखने की ताकीद की।

योगेश्‍वर ने नोटिफिकेशन शेयर करते हुए लिखा, ”ऐसे अफसर से राम बचाए, जब से खेल विभाग में आए हैं, तब से बिना सिर-पैर के तुग़लकी फ़रमान जारी किए जा रहे है। हरियाणा के खेल-विकास में आपका योगदान शून्य है किंतु ये दावा है मेरा, इसके पतन में आप शत् प्रतिशत सफल हो रहे हैं। अब हरियाणा के नए खिलाड़ी बाहर पलायन करेंगे और साहब आप ज़िम्मेदार।” दत्‍त ने आगे कहा, ”इनको तो ये भी नहीं पता कि प्रो-लीग जब होती है तो खिलाड़ी जो विभिन्न कैम्‍प में रहते हैं, इसमें हिस्सा लेते हैं। कितनी बार छुट्टियों का अप्रूवल कहां-कहां से लेते रहेंगे। अनुभव है कि नाम-चीन खिलाड़ी जब “साहब” को सलामी नहीं ठोकते तो नए-नए पैंतरे अपनाते है उन्हे अपने पीछे भगाने के।”

इन ट्वीट्स के जवाब में खेमका ने लिखा, ”खेल एवं पुलिस दोनों में शिष्टता शोभित है। इस अधिसूचना के पहले वाणिज्यिक विज्ञापन या व्यवसायिक खेल सरकारी कर्मचारी के लिए निषिद्ध था। आपका क्रोध एवं अपशब्द दोनों ठीक नहीं। 48 दिनों के विलंब के बाद अभी अचानक यह आक्रमक प्रतिक्रिया क्यों?” इस पर योगेश्‍वर ने कहा, ”मीडिया के माध्यम से आज ये नोटिफ़िकेशन सामने आया है, तब जा कर तो उन खिलाड़ियो को पता चला जिन पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इतना बड़ा बदलाव और किसी को ख़बर भी नहीं। खेल के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों से विचार-विमर्श भी किया जा सकता था। अपनी बात-विचार दृढ़ता से रखना क्रोध-अपशब्द नही होता।”

खेमका ने जवाब में कहा, ”तो आपको जानकरी होगी कि कमर्शियल विज्ञापन एवं वाणिज्यिक खेल सरकारी कर्मचारियों के लिए निषिद्ध है। अपनी बात रखिए, लेकिन मर्यादा के साथ।” फिर योगेश्‍वर ने जवाब दिया, ”2007 से भारत मे सर्वाधिक प्रचलित खेल की सबसे बड़ी लीग चालू हुई। सम्पूर्ण देश के खिलाड़ी चाहे किसी राज्य या संस्था के हो, हरियाणा के भी खेलते हैं। आज तक उसका संज्ञान नही लिया। किसी को नही बताया गया कि आपके लिए निषिद्ध है।अचानक सिर्फ़ हरियाणा के ओलंपिक खिलाड़ियो पर ही क्यों?”

खेमका ने अपने आखिरी ट्वीट में कहा, ”देश, प्रदेश या नियोक्ता के लिए खेलना पेशेवर खेल में नहीं आता। जब खेल के पहले आपकी नीलामी होती हो और आप सबसे बड़े बोलीदाता के लिए खेलें, तो यह पेशेवर खेल हैं। सरकारी कर्मचारी के लिए यह निषिद्ध है।”

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