उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित एक सरकारी स्कूल इन दिनों अपने इनोवेटिव टीचिंग मेथड के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। इस स्कूल के एक शिक्षक ने बच्चों को स्क्रैप मेटेरियल का इस्तेमाल करके साधारण ड्रोन और रोबोट बनाना सिखाया है। सोशल मीडिया पर इस एक्टिविटी के वीडियो शेयर किए जाने के बाद इस पहल ने लोगों का ध्यान खींचा। यूजर्स शिक्षक और बच्चों की खूब तारीफ कर रहे हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार जिले के अकबर ब्लॉक अंतर्गत भिलावाली गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक आशीष कुमार ने स्कूली बच्चों के लिए एक छोटा रोबोटिक वर्कशॉप शुरू किया है। इस वर्कशॉप के तहत पुराने मोटर, टूटे ट्वॉय कार, तार और प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमार करके बच्चे साधारण रोबोटिक मॉडल और छोटे ड्रोन असेंबल करना सीख रहे हैं।

बता दें कि यह इस पहल की शुरुआत, किताबों तक सीमित पढ़ाई से आगे बढ़ने की एक कोशिश के तौर पर हुई थी। आशीष कुमार ने कहा कि वह चाहते थे कि छात्र यह देखें कि असल में साइंस कैसे काम करता है। महंगे उपकरणों पर निर्भर रहने के बजाय, उन्होंने बच्चों से कहा कि वे अपने घरों और आस-पास की दुकानों से बेकार चीजें लेकर आएं। फिर इन चीजों का इस्तेमाल क्लासरूम सेशन के दौरान काम करने वाले मॉडल बनाने के लिए किया जाता है।

उन्होंने बताया कि बच्चों को छोटे मोटरों के जोड़ने, तारों को अरेंज करने और वैसी संरचनाओं को बनाने की गाइडेंस दी जाती है जो उड़ या मूव कर सकें। साथ ही उन्हें विज्ञान और गणित के बेसिक आइडिया से भी अवगत कराया जाता है।

एक्टिविटी के बारे में बताते हुए आशीष ने कहा, “इसका मकसद छात्रों को यह दिखाना है कि विज्ञान सिर्फ किताबों तक ही सीमित नहीं है।” वे कहते हैं, “जब बच्चे अपने हाथों से कुछ बनाते हैं और उसे चलते हुए देखते हैं, तो वे उस कॉन्सेप्ट को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं।”

गौरतलब है कि आशीष और बच्चों की कोशिशों ने ना केवल स्कूल और गांव के लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि इंटरनेट पर भी सनसनी फैला दी है। वीडियो जिसमें बच्चे एक छोटे रोबोटिक डिवाइस पर काम करते दिख रहे हैं, उसे हजारों लोगों ने शेयर और लाइक किया है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी यह वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया।

वहीं, इस प्रोजेक्ट को स्कूल के बाहर भी प्रस्तुत किया गया है। आशीष ने अलीगढ़ महोत्सव के दौरान इस पहल को प्रदर्शित किया, जहां आगंतुकों ने छात्रों द्वारा तैयार किए गए मॉडल देखे। अधिकारियों और शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से सरकारी स्कूलों में व्यावहारिक शिक्षा लाने में मदद मिल सकती है, जहां अक्सर संसाधन सीमित होते हैं।

गांव के शिक्षकों और अभिभावकों ने इस प्रयास का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस गतिविधि ने विज्ञान की कक्षाओं में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाई है और उन्हें नए विचारों को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया है।

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