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गधों की गिरफ्तारी वाली खबर पर एनडीटीवी एंकर से भिड़ गई उत्तर प्रदेश पुलिस

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जेल प्रशासन के द्वारा गधों को हिरासत में लिया गया था।

एनडीटीवी का लोगो( Photo Source: NDTV)

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जेल प्रशासन के द्वारा गधों को हिरासत में लिया गया था। मिली जानकारी के अनुसार उरई में हिरासत में लिए गए इन गधों ने जिला जेल के बाहर लगे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था जिसके बाद जेल प्रशासन के कर्मचारी इन्हें पकड़कर ले आए। समाचार एजेंसी एएनआई ने इस मामले का एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में जेल अधिकारियों के साथ ही गधे के मालिक और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी थे। एएनआई से ये खबर आते ही तमाम समाचार चैनलों और न्यूज़ पोर्टलों ने ये लिखना शुरू कर दिया कि यूपी पुलिस अब गधों को गिरफ्तार करने में बिजी हो गई है। एनडीटीवी ने भी गधों की गिरफ्तारी की इस खबर को चलाया। एनडीटीवी ने अपने न्यूज़ पोर्टल पर भी इस खबर को पब्लिश किया। चैनल की एंकर सुपर्णा सिंह ने खबर के लिंक को ट्वीट किया। खबर देख यूपी पुलिस के ट्विटर हैंडल से लिखा गया कि इस खबर का यूपी पुलिस से कोई लेना देना नहीं है।

इस पर सुपर्णा ने जवाब देते हुए लिखा कि हमारी खबर में कहीं यूपी पुलिस का जिक्र नहीं है, आप दोबोरा से पढ़ें।

 

सुपर्णा के इस ट्वीट पर फिर से यूपी पुलिस ने रिट्वीट करते हुए लिखा- हमने दोबोरा पढ़ा, आप भी दोबारा पढ़ लें..। आपने लिखा है कि यूपी में पुलिस गधों को पकड़ रही है..।

सुपर्णा सिंह को समझ आ गया कि तमाम सावधानियों को बाद भी गलती से स्टेट पुलिस का नाम आ गया है तो उन्होंने सफाई देते हुए लिखा – वीडियो में यूपी पुलिस का जिक्र था, उस वीडियो को हटा लिया गया है। जाइए ऐसा करने वालों को गिरफ्तार करें। आपका दिन शुभ हो।

यूपी पुलिस ने सुपर्णा के इस ट्वीट को भी नजरअंदाज नहीं किया और जवाब दिया कि अगर आप कुछ और कंटेंट चलाओ तो हमें कोई दिक्कत नहीं। आपका दिन भी शुभ हो।

आपको बता दें कि राज्यों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी स्टेट पुलिस के पास होती है जबकि राज्यों के कारागारों की जिम्मेदारी जेल पुलिस की होती है। गृह विभाग के सर्कुलर के मुताबिक राज्य पुलिस और जेल पुलिस का मैनुअल भी अलग-अलग होता है। दोनों का सर्विस कोड और प्रशासनिक ढांचा भी अलग-अलग होता है।

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