13 महीने से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, लोग बोले – इस लड़ाई से लोकतंत्र थोड़ा मजबूत हुआ

धर्मेश दिक्षित (@theDDixit) नाम के ट्विटर अकाउंट से लिखा गया किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ, किसान आंदोलन सफल हुआ है।

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13 महीने से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, लोग बोले – इस लड़ाई से लोकतंत्र थोड़ा मजबूत हुआ( एक्सप्रेस फोटो/ गजेंद्र यादव)

दिल्ली की सीमाओं पर बीते 13 महीनों से डटे किसानों ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि 11 दिसंबर से सिंघु बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर समेत सभी जगहों से किसान घर वापसी करेंगे। पंजाब को लेकर कहा गया कि 13 दिसंबर को किसान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में अरदास करेंगे और अपने घरों को पहुंच जाएंगे। किसान आंदोलन के खत्म होने पर सोशल मीडिया पर कई प्रकार की प्रतिक्रिया आ रही है।

सौरभ त्रिपाठी (@saurbh_LT) नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा कि आखिर खत्म हुआ किसान आंदोलन। ये संघर्ष याद रखा जाएगा। नरेंद्र नाथ मिश्रा (@narendra nath mishra) नाम के टि्वटर हैंडल से कमेंट आया 1 साल तक सड़क पर रहने के बाद देश का सबसे बड़ा, लंबा और प्रभावी आंदोलन चलाने के बाद सरकार ने अधिकतर मांगें मानी। किसानों के घर लौटने पर बड़ा स्वागत होगा।

स्वाति मिश्रा (@swati_mishr) नाम की ट्विटर यूजर लिखती है कि किसानों का आंदोलन हमेशा याद रखा जाएगा और ये भी याद रखिए कि अभी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। किसान आंदोलन ने देश में आंदोलनों के लिए एक उम्मीद जगाई है। लोकतंत्र को और थोड़ा मजबूत किया है। पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह लिखते हैं कि बिना एमएसपी पर कानून के जीत कैसी? भोले थे मन के छले गए,अन्नदाता।

378 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन खत्म, दिल्ली के बॉर्डर से जल्द घर वापसी करेंगे किसान

रणविजय सिंह (@ranvijaylive) नाम के ट्विटर अकाउंट से कमेंट आया, “झूठे का मुंह काला, सच्चे का बोलबाला। यह बात मीडिया के एक तबके को समझनी होगी। कितना भी प्रोपोगंडा चला लो, खालिस्तानी, आतंकवादी बोल लो, लेकिन सच के सामने हार निश्चित है। अपने आका के लिए किसानों को क्या कुछ नहीं कहा, लेकिन अब उन्हीं की जीत के किस्से चलाने होंगे…चलाओ… चलाओ।

धर्मेश दिक्षित (@theDDixit) नाम के ट्विटर अकाउंट से लिखा गया किसान आंदोलन खत्म नहीं हुआ, किसान आंदोलन सफल हुआ है। वैभव तिवारी (@vaibhavlivejour) नाम के ट्विटर हैंडल से कमेंट आया परेशानी जायज थी, अन्नदाताओं ने खुद को संघर्ष में झोंका। सरकार अनसुना करते हुए, किसान हित में कार्य करने को तैयार हुई। किसान सड़कों से अब घर लौटेंगे। कदंबिनी शर्मा (@sharmaKadmbini) नाम की ट्विटर यूजर लिखती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में ये अपनी तरह कब बिल्कुल अलग और अद्भुत आंदोलन रहा।

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