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चाटुकारिता की कोई सीमा नहीं होती- सिंधिया ने आपातकाल को बताया काला दिन तो भड़क गये दिग्विजय सिंह, दिया ये जवाब

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आपातकाल को बताया काला दिन तो दिग्विजय सिंह ने कहा – चाटुकारिता की कोई सीमा नहीं होती।

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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (फोटो: पीटीआई)

भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को 47 साल पूरे हो गए। 25-26, 1975 जून की रात भारत में आपातकाल के दौर की शुरुआत हुई थी।  भाजपा के नेता इसे काला दिन के तौर पर मानते हैं।  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी आपातकाल को काला दिन बताया तो दिग्विजय सिंह भड़क गए।  

दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़ी दो फोटो शेयर करते हुए लिखा कि “चाटुकारिता की कोई सीमा नहीं होती ! उनसे कभी उम्मीद नहीं की थी। सत्ता का लालच क्या क्या न कराए। ” इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने जिन फोटो को शेयर किया, उसमें से एक में सिंधिया ने तब भाजपा द्वारा काल दिवस मनाने पर आक्रोश व्यक्त किया था जब वो कांग्रेस में थे। दूसरे फोटो में सिंधिया का वो स्क्रीनशॉट है जिसमें वह आपातकाल को काला दिन बता रहे हैं।’

सिंधिया ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि “25 जून 1975, आज ही के दिन हमारे गौरवशाली लोकतंत्र की हत्या कर तत्कालीन सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन था। इसके विरोध में उठी हर आवाज को मेरा सादर नमन।”

लोगों की प्रतिक्रियाएं: मनमोहन झा ने दिग्विजय सिंह को जवाब देते हुए लिखा कि ‘ये बात आप जैसे कांग्रेसियों से बेहतर कौन समझ सकता है या पता हो सकता है।आप जैसे माहिर लोगों ने सत्ता के लिये क्या क्या किया है? ये जनता सब जानती है।’ कृष्ण नाम के यूजर ने लिखा कि ‘सत्ता के लिए बड़े बड़े अपना ईमान बेच देते है चाहे कोई महाराज ही क्यों न हो।’

ओम नारायण मिश्रा ने लिखा कि ‘दरअसल उन्होंने खुद नहीं लिखा है, यह पीएम और गृहमंत्री ने जबरदस्ती बीजेपी के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए लिखने के लिए कहा है। लेकिन वह यह नहीं समझते हैं कि सिंधिया पहले कभी भी इतिहास में और आज भी वफादार नहीं हैं।’ दुष्यंत पटेल ने लिखा कि ‘शुद्ध और अच्छे दिल वाले आदमी को कभी ना कभी अपनी भूल का अहसास होता है, तुम नहीं समझोगे।’

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, इसके बाद वह कई विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे।मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई और भाजपा की सरकार बना ली थी। सिंधिया को केंद्र में मंत्री बना दिया गया। 

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