बिहार के छपरा जिले से रिश्तों को तार-तार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। दरअसल, जिले के जवईनिया गांव में दो बेटियों को अपनी मां का अंतिम संस्कार करना पड़ा। हालांकि ऐसा किसी अधिकार के चलते नहीं बल्कि परिवार में किसी पुरुष सदस्य के नहीं होने की वजह से किया गया। इन दो बहनों के सिर से पिता का साया भी कुछ समय पहले उठ गया था और जब मां ने दुनिया को अलविदा कहा तो कोई रिश्तेदार भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए नहीं आया।
अंतिम यात्रा में गिनती के 8 लोग हुए शामिल
कलेजा चीर देने वाली इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों बहनें मां के शव को कंधे पर रखकर ले जा रही हैं। इस अंतिम यात्रा में गिनती के 8 लोग नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन बेटियों ने ही मां की चिता को अग्नि दी। लोग इस वीडियो को देखकर भावुक हैं और इन बहनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट कर रहे हैं।
बहनों ने मिलकर पूरी की अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
अंतिम संस्कार के वक्त परिवार के साथ खड़े होने के लिए कोई करीबी रिश्तेदार या ग्रामीण आगे नहीं आया। घर में कोई पुरुष सदस्य भी मौजूद नहीं था जो पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभा सके। ऐसे में इन बहनों ने ही इस जिम्मेदारी को निभाया और मां को मुखाग्नि दी। बड़ी बेटी मौसमी कुमारी और छोटी बेटी रौशनी कुमारी ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं।
मौसमी ने बताया कि वह दिल्ली में नौकरी करती है और मां के बीमार होने की सूचना पर घर पहुंची थी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण उसने स्वयं मुखाग्नि देने का निर्णय लिया।
लोगों ने लड़कियों की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने दोनों लड़कियों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। लोगों ने इन दोनों की मदद के लिए भी हाथ आगे बढ़ाया है। वायरल पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, “क्या आप कुछ डिटेल्स उपलब्ध करा सकते है। इन बहनो की जिसे कुछ मद्दत भेज सकें।
एक और अन्य यूजर ने लिखा है- इन्होंने ऐसा क्या किया की पूरा समाज इनके विरुद्ध हो गया जाति और भेदभाव घरों से ही सिखाया जाता है ये दुर्भाग्यपूर्ण है जब एक जाति खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझेगी और दूसरे को निम्नतर तो भविष्य बहुत भयावह होगा इसलिए समाज से जाति प्रथा समाप्त करो और इंसान बनो नहीं तो ऐसे दिन देखने पड़ेंगे। इस पोस्ट पर लोग जातिवाद को लेकर बहस भी करने लगे हैं।
