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भाषण पर भ्रम या जानबूझकर साधा निशाना? ट्रोल्स ने मोदी को दी इतिहास पढ़ने की नसीहत

लोगों का कहना है कि जिस वक्त बीजेपी थी ही नहीं उस वक्त पंडित नेहरू उससे डर कैसे सकते हैं। ट्विटर यूजर्स ने पीएम मोदी को 'इतिहास की सही जानकारी रखने' की सलाह तक डे डाली।

Author नई दिल्ली | October 17, 2017 11:58 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- ANI)

सोमवार को गुजरात में दिए गए भाषण की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोशल मीडिया के एक धड़े ने ट्विटर पर ट्रोल करना शुरू कर दिया। पीएम मोदी ने गुजरात में एक जनसभा में कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा था कि पंडित नेहरू जनसंघ से डरते थे और अब कांग्रेस बीजेपी से डरती है। वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक, मोदी ने अपनी स्पीच में कहा कि नेहरू भी बीजेपी से डरते थे और अब कांग्रेस भी डरती है।

दरअसल पीएम मोदी ने कहा था, ‘ज्योतिसंघ अहमदाबाद में एक संस्था चल रही है। 50-60 के दशक में पंडित नेहरू ज्योतिसंघ के कार्यक्रम में आए थे। और मैंने सुना है, लोग हमें बताते थे, हम तो उस समय बालक थे तो पता नहीं क्या हुआ? लेकिन जो बाद में सुना था, वो कहते हैं कि ज्योति संघ के कार्यक्रम में पंडित नेहरू ज्योति संघ बोलना भूल जाते थे और बार-बार जनसंघ बोलते थे। बार-बार जनसंघ…इनके जेहन में उस समय, जबकि जनसंघ एक बालक था, अभी तो पालने में झूल रहा था, तब भी पंडित नेहरू कांप रहे थे जी। आज भारतीय जनता पार्टी से इनका कांपना बहुत स्वभाविक है।’

सोशल मीडिया में मोदी के इस भाषण के अंश को लेकर उन पर निशाना साधने की कोशिश की गई। इन लोगों का कहना था कि जिस वक्त बीजेपी थी ही नहीं उस वक्त पंडित नेहरू उससे डर कैसे सकते हैं। ट्विटर यूजर्स ने पीएम मोदी को ‘इतिहास की सही जानकारी रखने’ तक की सलाह डे डाली।

एक ट्विटर यूजर ने कहा, ‘मोदी जी श्री नेहरू का बीजेपी के बनने से 16 साल पहले ही निधन हो गया था। कृप्या आप इतिहास के बारे में पहले सही जानकारी रखें, उसके बाद बोलें।’ सोशल मीडिया में यूजर्स ने ‘बदतमीज विकास’ के हैशटैग से कई ट्वीट्स किए।

 

साथ ही पीएम मोदी पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का भी आरोप लगाया गया। इसके अलावा यह भी कहा गया कि नेहरू के वक्त बीजेपी पैदा ही नहीं हुई थी, ऐसे में कांपने की बात कहां से आती है?

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोधवाडिया ने ट्वीट कर पूरे आंकड़े पेश करते हुए लिखा कि पीएम मोदी को खुद के पार्टी के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए।

वहीं पीएम मोदी की भाषा शैली पर भी लोगों ने सवाल खड़े करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री के मुंह से इस तरह की बातें शोभा नहीं देती हैं।

इसके अलावा अपने भाषण में पाटीदार आंदोलन के बाद पटेल समुदाय के एक वर्ग की नाराजगी को समझते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ इस पार्टी ने, इस परिवार ने किस तरह का व्यवहार किया, इतिहास इसका गवाह है। मैं इसे दोहरना नहीं चाहता । सरदार पटेल की पुत्री मणिबेन और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ किस प्रकार का व्यवहार इस पार्टी ने किया, यह सभी के सामने है। इनको हर प्रकार से नेस्तनाबूद करने का काम किया । गुजरात उनको (कांग्रेस और उसके नेतृत्व) पसंद ही नहीं था । उसने बाबू भाई पटेल के नेतृत्व वाली सरकार को तोड़ने का काम किया।

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