ताज़ा खबर
 

किसी ने शेयर किया इमाम बुखारी के शबाना आजमी को ‘तवायफ’ कहने का वीडियो, जावेद अख्‍तर ने जमकर लताड़ा

इस यूजर ने जावेद अख्तर को टैग करते हुए लिखा, 'शबाना आजमी ने पद्मावती विवाद पर स्मृति ईरानी की चुप्पी के लिए उन्हें लताड़ा है, लेकिन यही शबाना आजमी चुप थीं, जब इमाम बुखारी ने उन्हें तवायफ कहा था, मियां जावेद अख्तर इमाम की टिप्पणी पर शबाना चुप क्यों थीं।'
शबाना एक समाजिक कार्यकर्ता हैं और वह मिजवान वेलफेयर सोसाइटी नामक एनजीओ चलाती हैं। (File Photo)

पद्मावती विवाद के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच अभिनेत्री शबाना आजमी द्वारा इस मुद्दे पर सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी पर हमला किया गया। इसके जवाब में एक ट्विटर यूजर ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया जिसमें दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम शबाना आजमी को तवायफ कहते नजर आ रहे हैं। एनडीटीवी के इस वीडियो में एक बहस के दौरान शाही इमाम कहते हैं कि वे किसी नाचने-गाने वाली और तवायफ की बात पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे।गौरव प्रधान नाम के इस यूजर ने जावेद अख्तर को टैग करते हुए लिखा, ‘शबाना आजमी ने पद्मावती विवाद पर स्मृति ईरानी की चुप्पी के लिए उन्हें लताड़ा है, लेकिन यही शबाना आजमी चुप थीं, जब इमाम बुखारी ने उन्हें तवायफ कहा था, मियां जावेद अख्तर इमाम की टिप्पणी पर शबाना चुप क्यों थीं।’

इस वीडियो पर जावेद अख्तर बुरी तरह से भड़क गये। उन्होंने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘ऐसा कहना कितनी बेवकूफी की बात है कि शाही इमाम की टिप्पणी पर शबाना चुप थी, वास्तव में उसने शबाना को गाली इसलिए दी क्योंकि वो उनके बारे में चुप नहीं थी, क्या तुम इतनी सी बात भी समझ नहीं सकते हो। ऐसा लगता है ना तो तुम्हारे पास सूचना है ना ही कॉमन सेंस। तुम बकवास हो।’ बता दें कि शबाना आजमी पद्मावती विवाद पर मुखर होकर प्रतिक्रिया दे रही हैं। इससे पहले शबाना ने कहा था कि फिल्म पद्मावती के विरोधियों को सरकार द्वारा कुछ नहीं कहने के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पद्मावती विवाद के बहाने ही कई लोगों की दुकान चल रही है।

शबाना आजमी के पति और मशहूर गीतकार शायर जावेद अख्तर भी ‘पद्मावती’ के विरोध के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि फिल्म की कहानी ऐतिहासिक नहीं है। जावेद अख्तर ने साहित्य आजतक कार्यक्रम में कहा कि पद्मावती की  कहानी उतनी ही नकली है, जितनी सलीम अनारकली की। इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है। उन्होंने सलाह दी है कि अगर लोगों को वाकई इतिहास में अधिक रुचि ही है, तो इन फिल्मों की बजाए गंभीर किताबों से समझाना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App