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गौरी लंकेश की हत्या पर विवादित ट्वीट करने वाले निखिल दधीचि ने रवीश कुमार को लिखा खुला खत, लगाए ये आरोप

बीते दिनों बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद विवादित टिप्पणी कर चर्चा में आए ट्विटर यूजर निखिल दधिची ने टीवी पत्रकार रवीश कुमार को पत्र लिखा है।

दधीचि के इस ट्वीट को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से जोड़कर देखा गया। जब उनसे ट्वीट के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया, ‘ये एक साधारण ट्वीट था।’ (फोटो सोर्स ट्विटर)

बीते दिनों बेंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद विवादित टिप्पणी कर चर्चा में आए ट्विटर यूजर निखिल दधीचि ने टीवी पत्रकार रवीश कुमार को पत्र लिखा है। पत्र रवीश द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे खत का जवाब है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को निखिल दधीचि जैसे अपशब्द कहने वालों को ट्विटर पर फॉलो करने के लिए निशाना साधा था। रविश कुमार सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करने वालों को लेकर मोदी पर निशाना साधते रहे हैं और अपने डर का इजहार करते रहे हैं।

निखिल दधिची ने यहीं पत्र ब्लॉग पर पोस्ट किया है-

नमस्कार, आपका प्रधानमंत्री जी के नाम लिखा पत्र पढ़ा। आपके पहले के कई पत्र भी मैंने पढ़े है लेकिन यकीन मानिए अब आपके पत्र प्रभावित नहीं करते क्योंकि जब अन्तरात्मा पर एजेंडा हावी हो जाये तो अन्तरात्मा की आवाज़ दब जाती है। आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। आप डरे हुए नहीं बल्कि परेशान ज्यादा नजर आ रहे है , किसी दूसरे से नहीं बल्कि अपने आप से अपनी स्वयं की अन्तरात्मा से। इंसान कितना भी कुछ भी कर ले उसकी अन्तरात्मा किसी एजेंडे को स्वीकार नहीं करती। वो स्वयं में स्वतंत्र रहना पसंद करती है। मेरे प्रकरण में आपको अपनी हार नजर आती है जबकि इसमें हार या जीत जैसा कुछ नहीं था। आपकी और मेरी विचारधारा बेशक अलग है लेकिन मेरे मन में किसी विपरीत विचारधारा वाले के लिए कोई द्वेष न था न है। मैं जब छोटा था आपकी तब की पत्रकारिता और अब की पत्रकारिता में विरोधाभास नजर आ रहा है। आप परेशान इसलिए है कि लोग अब आपको टीवी पर देखना पसंद क्यों नहीं करते । जवाब आपकी अन्तरात्मा देती होगी लेकिन आप उसको सुनना नहीं चाहते। एक पत्रकार जब तटस्थ पत्रकारिता छोड़ कर एजेंडा लेकर चलने लगता है तो वो पत्रकार नहीं रह जाता। पत्रकार को हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए। आपको मेरे एक अदद ट्वीट से आपत्ति हुई या यूं कहूँ की उसके बाद से आपको मुझ जैसे साधारण इंसान में एक बड़ा शत्रु नजर आने लगा और आपने मेरे खिलाफ एक मुहिम चला दी की जब तक मोदी जी मुझे अनफॉलो नहीं करते आप चैन से नहीं बैठेंगे।

इंसान जब किसी पर आरोप लगाता है तो उसे हमेशा निष्पक्ष रहना होता है। मुझे सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा पर आपकी आपत्ति जायज लगी पर सवाल ये है कि ये आपत्ति एक तरफा क्यों है? आपको प्रधानमंत्री जी द्वारा मुझे एवम अन्य लोगों को फॉलो किये पर आपत्ति है किंतु आप स्वयं मुहम्मद अनस जैसो को फॉलो करते है उनके साथ चाय पीते है और उनके किसी पोस्ट को फेसबुक द्वारा हटाने पर उसके समर्थन में खड़े होते है!! आप RW समर्थकों की भाषा पर आपत्ति जताते है लेकिन LW या अन्य पार्टियों के समर्थकों की निम्नतम स्तर की भाषा पर चुप्पी साध लेते है!! आपको मेरे एक अदद ट्वीट से तकलीफ होती है लेकिन वही शब्द जब अखिलेश प्रताप सिंह जी मेरे व मेरे परिवार के लिए प्रयोग करते है तो आप आंखे मूंद लेते है। दिग्विजय सिंह जी , मनीष तिवारी जैसे लोग प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द कहते है तो आपको कोई आपत्ति नहीं होती उल्टे आप उन्हें भी फॉलो करते हैं! आश्चर्य!!! तहसीन पूनावाला जैसे लोग स्मृति ईरानी जी के लिए अभद्र भाषा बार बार प्रयोग करते है पर आप चुप रहते है। आप तो महिला सम्मान के हिमायती है फिर क्या कारण है कि स्मृति जी के लिए अभद्र भाषा पर आप कुछ नहीं बोल पाते।

केजरीवाल प्रधानमंत्री जी को अपशब्द कहते है तो आपके अंदर का पत्रकार चादर तान कर सो जाता है। मेरे खिलाफ जैसी मुहिम आपने चलाई है वैसी केजरीवाल के समय आपके द्वारा कहीं देखने को नहीं मिली। आपने कभी भी ये मांग नहीं उठाई की केजरीवाल को प्रधानमंत्री जी अनफॉलो करना चाहिए!!! ऐसा क्यों रविश जी? आप मुझ पर गालीबाज होने का आरोप लगाते है लेकिन खुद गालीबाज के समर्थन में फेसबुक पर लिखते है। खैर मुझे आपके विरोध से कोई आपत्ति नहीं है। मैं आपके विचारों से हो सकता है असहमत होऊ पर आपके विचार रखने की आपकी आजादी का सम्मान अवश्य करूँगा, यही कारण है मैंने आपकी किसी बात पर आपत्ति नहीं कि । मेरा मानना है लोकतंत्र में सबको अभिव्यक्ति की आजादी है, बोलने की स्वतंत्रता है और कोई दूसरा इसे कभी नहीं छीन सकता। आपको अक्सर शिकायत रहती है कि आज का युवा इतना उग्र स्वभाव का क्यों है ?, पत्रकारों के प्रति वो नफरत की निगाह से क्यों देखता है? रविश जी आज का युवा उग्र नहीं है वो शिक्षित और समझदार हो चला है वो खबरों पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करता बल्कि उनका अपने स्तर पर विश्लेषण करता है। वो दादरी में अखलाख के मारे जाने की खबर 24 घण्टे देखता है तो उसे भी दुःख होता है मगर सिक्के के दूसरी तरफ जब वो मुडबिडरी में प्रशांत पुजारी के मरने की खबर किसी भी जगह नहीं पाता तो उसे बड़ा आश्चर्य होता है। उसे और भी बुरा तब लगता है जब वो अलवर में पहलू खान तक पहुंच जाने वाले मीडिया और पत्रकारों को स्टूडियो से कुछ किलोमीटर दूर दिल्ली के डॉक्टर नारंग के यहां नहीं पाता। ऐसे में उसके मन मे आक्रोश होना लाजमी है और इसके जिम्मेदार वो लोग है जो दोमुंही पत्रकारिता करते है।

मीडिया को देश के लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है लेकिन बड़ी शर्म के साथ कहना पड़ता है कि इसी चौथे स्तम्भ में कुछ लोग पत्रकारों के भेष में इसे दीमक की तरह खाये जा रहे है जिससे ये स्तम्भ हाल के समय मे बेहद कमजोर हो गया है। खैर छोड़िए, रविश जी आप अक्सर महिलाओं के मुद्दों पर बोलते नजर आते है सही बोलूं बहुत अच्छा लगता है महिलाओं के मुद्दों पर आपका बोलना लेकिन फिर जब किसी बृजेश पांडे का मामला आता है तो पता नहीं क्यों आपके चैनल पे वो समाचार दूरबीन लेकर ढूंढने पर भी नजर नहीं आता, दिल को तस्सली देकर मेरे जैसे कई लोग इंतजार करते है कि रवीश जी अपने प्राइम टाइम में इसे जरूर दिखाएंगे पर हमें निराशा ही हाथ लगती है। ऐसा क्यों? आप मेरा फ़ोटो किसी नेता के साथ होने पर उसे ब्रेकिंग न्यूज़ बना देते हो पर बृजेश पांडे का बिहार कोंग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष और एक बड़े जर्नलिस्ट का भाई होने पर भी उसकी न्यूज़ नहीं दिखाते। ऐसे में सोचना पड़ता है कि ऐसा क्यों हुआ। आप मेरे ट्वीट के जिम्मेदार देश के प्रधानमंत्री जी को बता कर उन्हें बदनाम करने के लिए एक अभियान चलाये हुए है।

रविश जी मेरे किसी ट्वीट का देश के प्रधानमंत्री जी से क्या लेना देना। अगर आप ये मानते है कि अपने किसी फॉलोवर के किसी ट्वीट के लिए देश के प्रधानमंत्री जी जिम्मेदार है तो ये बात निश्चित रूप से हर एक शक्श पर लागू होती है। इस हिसाब मनीष तिवारी, दिग्विजय सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह , तहसीन पूनावाला की भाषा के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी जिम्मेदार है, आपने सोनिया जी से इन लोगो पर कार्यवाही की कोई बात नहीं कि ना ही सोनिया जी या राहुल गांधी को निशाना बनाया। इन्हें छोड़िए आप स्वयं दिग्विजय सिंह, संजय निरुपम, मनीष तिवारी को फॉलो करते है, इनकी भाषा के जिम्मेदार क्या आप है? अगर प्रधानमंत्री जी अपने किसी फॉलोवर के ट्वीट के लिए जिम्मेदार है तो आप स्वयं देश के करोड़ो रूपये लेकर फरार हो जाने वाले विजय माल्या और ललित मोदी को फॉलो करते है , आपके तर्क के हिसाब इन दोनों के कार्यों के लिए क्या आप जिम्मेदार है? अगर नहीं तो मेरे किसी ट्वीट के लिए मोदी जी जिम्मेदार कैसे? देश के प्रधानमंत्री को किस साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है और किसके इशारे पर?

आपके शब्दों में आप एक निष्पक्ष पत्रकार है इस नाते मैं चाहूंगा की कल जब आप प्राइम टाइम में आये तो देश को बताये की मेरे किसी ट्वीट के लिये मोदी जी जिम्मेदार है तो जिनको आप फॉलो करते है उनकी गाली वाली भाषा के लिए आप जिम्मेदार कैसे नहीं , कोंग्रेस नेताओं की भाषा के लिए सोनिया जी एवं राहुल गांधी जिम्मेदार क्यों नहीं है? आप देश को बताये की महिला सुरक्षा पर जागरूक रहने वाला उनके अधिकारों के लिए लड़ने वाला पत्रकार बृजेश पांडे पर चुप क्यों हो जाता है? प्राइम टाइम में रविश जी देश को ये बताये जब मेरे ट्वीट या कार्य के जिम्मेदार प्रधानमंत्री मोदी है तो विजय माल्या और ललित मोदी के कारनामों के जिम्मेदार वो स्वयं रविश क्यों नहीं है ? रविश बताये की किसी साधारण इंसान की भाषा पर प्रधानमंत्री जी से अन्फॉलो की मांग करने वाले रविश जी ने उपरोक्त गालीबाज और घोटालेबाज लोगों को अभी तक क्यों फॉलो कर रखा है। रविश जी आपको मेरे ट्वीट से तकलीफ है तो सवाल मुझसे किये जाने चाहिए मैं तैयार हूँ जवाब देने के लिए। बेवजह देश के प्रधानमंत्री जी को निशाना बना कर बदनाम करने के पीछे क्या एजेंडा है? मेरी आपसे प्रार्थना है भगवान के लिए देश के प्रधानमंत्री जी को बेवजह बदनाम मत करिये।

आपको मुझसे तकलीफ है तो लिखिये मेरे बारे में खूब लिखिए रोज लिखिए गलत सही जो मन में आये लिखिए मैं कोई आपत्ति नहीं करूंगा न सवाल करूँगा क्योंकि ये आपकी अभिव्यक्ति की आजादी है और मैं इसका हनन नहीं करूंगा।रविश जी मेरा आपसे सवाल है कि क्या मोदी जी का मुझ जैसे अदने इंसान को फॉलो या अनफॉलो करना इस देश की जनता के लिए बहुत बड़ा महत्व रखता है या इस देश की राष्ट्रीय समस्या में से एक है ? क्या मोदी जी के किसी को अनफॉलो करने से इस देश की GDP में वृद्धि हो जाएगी या कमी हो जाएगी? क्या इससे किसी गरीब की थाली में रोटी आ जायेगी? शायद नहीं फिर भी इतने बड़े पत्रकार होने पर भी आपका मेरे जैसे साधारण इंसान के लिए इतना समय बर्बाद करना समझ से परे है। आप कई बार बातें बड़ी अच्छी करते है देश की समस्याओं पर नए भारत के निर्माण पर दिल को छू जाती है लेकिन सिर्फ बातों से क्या होता है कुछ धरातल पर भी होना चाहिए।

इंसान को शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए फिर दूसरों से अपेक्षा करनी चाहिए। आप स्वयं अनेक गालीबाजों को फॉलो करते है और प्रधानमंत्री जी पर सवाल उठाते है !! अजीब नहीं लगता आपको ये नाटक? आपने मेरे प्रधानमंत्री जी द्वारा फॉलो को राष्ट्रीय मुद्दा बना रखा है । रविश जी मुझे प्रधानमंत्री जी अन्फॉलो कर भी दे तो इससे किसी गरीब का कोई भला नहीं होगा। असल में आप लोग जिस तरह से देश के निर्दोष प्रधानमंत्री जी को जिस तरह से बदनाम कर रहे है मैं स्वयं प्रधानमंत्री जी आग्रह करना चाहूंगा कि वो मुझे अन्फॉलो कर दे, कम से कम आप लोग देश के निर्दोष प्रधानमंत्री को निशाना बनाना तो बंद करोगे। मुझे इससे बड़ी पीड़ा होती है की मेरे प्रधानमंत्री को बिना वजह बदनाम किया जा रहा है। समझ नहीं आता कैसी मानसिकता के लोग है या किसके इशारे पर काम कर रहे है जो मेरे ट्वीट के लिए बेवजह मोदी जी को जिम्मेदार मानते है। मैं अपने प्रधानमंत्री जी आपके माध्यम से करबद्ध होकर माफी मांगना चाहूँगा की उन्हें बेवजह निशाना बनाया गया है। महोदय मेरा फॉलो अन्फॉलो इस देश की राष्ट्रीय समस्याएं नहीं है इस देश की राष्ट्रीय समस्याएं वो है जो कई बार आप भी दिखाते है, महिला सुरक्षा, गरीबी, अशिक्षा आदि।

आप अक्सर गरीब और महिलाओं के विषय में बात करते है। आज मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आइये साथ मिलकर पहल करते है नवभारत निर्माण की। प्रधानमंत्री जी स्वच्छ भारत अभियान चला रहे है, स्टूडियो या घर में बैठ कर उसका मख़ौल उड़ाने की बजाय हम भी इसका हिस्सा बनें। जगह समय तारीख आप तय कर लीजिए। हम सब मिल कर स्वच्छता के लिए धरातल पर काम करते है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़ते है कमियां निकालने वाले हजार मिलेंगे पर किसी के अच्छे काम मे सहयोगी बन कर उसे अंजाम तक पहुंचाने वाले कम। आइये हम इसे अंजाम तक पहुंचाने वाले बने। एक बालिका की शिक्षा की जिम्मेदारी आप लीजिये एक बहन की जिम्मेदारी मैं लेता हूँ, यकीन मानिए मेरे कई अन्य साथी भी इसके लिए तैयार है और आपके साथी भी निश्चित ही होंगे। आइये साथ मिलकर काम करें। सभी पूर्वाग्रहों को भूल कर, बिना किसी एजेंडे के आइये साथ मिलकर काम करें। आपके जवाब का इंतजार रहेगा।

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