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चमकी बुखार पर अंजना ओम कश्यप ने अपनी तारीफ में किया ट्वीट तो वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा- हे अटेंडे/प्रोपगैंडे की प्रथम लेडी…

टीवी एंकर के इस ट्वीट पर वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पाण्डे ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, 'हे हेकलिंग की कली, हे अटेंडे/प्रोपोगैंडे की प्रथम लेडी, अब बस भी करीं। सचमुच के शोक से उपजी और शौक़िया 'शौक' देनेवाली पत्रकारिता में अंतर होता है।'

anjana om kashyapएंकर अंजना ओम कश्यप की फाइल फोटो। (image source-anjanaomkashyap.com)

बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) बीमारी के चलते हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती हुए बच्चों पर टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप की रिपोर्टिंग पर सोशल मीडिया के एक धड़े ने खूब नाराजगी जताई है। अंजना ने मंगलवार (18 जून, 2019) को आईसीयू वॉर्ड में घुसकर लाइव कैमरे पर डॉक्टर से बच्चों की मौत और उनके इलाज पर तीखे सवाल पूछे थे। इस दौरान हॉस्पिटल के मेडिकल स्टाफ के साथ उनकी बहस भी हुई। सोशल मीडिया पर चौतरफा घिरीं कश्यप ने अब अपनी सफाई में बुधवार को ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना जरुरी था। ऐसा है और रहेगा। उन्होंने ट्वीट में आगे लिखा, ‘ICU में आए बच्चों को अटेंडे करना जरुरी था, है, रहेगा। प्रोपोगेंडा वाले आज 108 बच्चों की मौत भूल गए। डॉक्टर के लिए मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालों, हेकलिंग का प्रपोगैंडा बंद करिए, फिर याद दिला दूं- अब तक 108 बच्चों की मौत।’

टीवी एंकर के इस ट्वीट पर वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पाण्डे ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, ‘हे हेकलिंग की कली, हे अटेंडे/प्रोपोगैंडे की प्रथम लेडी, अब बस भी करीं। सचमुच के शोक से उपजी और शौक़िया ‘शौक’ देनेवाली पत्रकारिता में अंतर होता है।’ पाण्डे के इस ट्वीट पर ट्विटर यूजर नीतीश यादव ने लिखा, ‘काश आप अंजना की सास होती, इसको राइट टाइम रखती हमेशा।’ नंनकिशोर ने लिखा, ‘दादीजी की नजर से बचना नामुमकिन है।’ अनिल वर्मा ने लिखा, ‘मैडम, इन्हें कुछ कहना भैंस के आगे बीन बजाने के समान हैं, क्योंकि इन्हें तो बस टीआरपी और सत्ता का सुख चाहिए, पत्रकारिता तो दूर की बात है, आपके जैसे महान, देशभक्त पत्रकार कि बात इन्हें कहा समझ में आएगी।’

वहीं ऑल्ट न्यूज के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने ट्वीट कर लिखा, ‘यह आजतक की साहसी पत्रकारिता है। हॉस्पिटल के अंदर नर्सो और डॉक्टरों पर गुस्सा करके उपद्रव पैदा करना। अगर वो इसके सौवें हिस्से के बराबर आक्रामकता से नेताओं से सवाल पूछे होते तो यह अपने आप में एक उपलब्धि होती।’

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