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खुलासा: टाइम्‍स नाउ ने 7 साल पुरानी फोटोशॉप्‍ड तस्‍वीर पर चला दी प्राइम टाइम स्‍टोरी

आल्ट न्यूज ने दावा है कि न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ ने इन्हीं तस्वीरों और हिजबुल के झंडे और साल 2014 और 2016 में वायरल हो रहीं कुछ तस्वीरों के जरिए इस स्टोरी को बनाया है।

Author Updated: June 24, 2017 5:25 PM
टीवी चैनल टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ राहुल शिवशंकर एक ‘प्राइम टाइम शो’ की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। (फोटो सोर्स वीडियो स्क्रीन शॉट)

टीवी चैनल टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ राहुल शिवशंकर एक ‘प्राइम टाइम शो’ की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल उन्होंने अपने शो में दिखाया कि अलग-अलग धर्मों की लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए उन्हें एक से सात लाख रुपए में बेचा जा रहा है। शो में उन्होंने खुलासा करते हुए कहा, ‘हिंदू ब्राहमण लड़की की कीमत पांच लाख रुपए, सात लाख रुपए सिख पजांबी लड़की की कीमत, गुजराती ब्राहमण की कीमत चार लाख रुपए, हिंदू क्षत्रिय लड़की की कीमत 4.5 लाख रुपए, हिंदू ओबीसी/एससी/एसटी लड़की की कीमत दो लाख रुपए, बौद्ध लड़की कीमत 1.5 लाख रुपए, जैन लड़की की कीमत तीन लाख रुपए है।’ शो मैं उन्होंने आगे कहा कि इन लड़कियों का धर्म परिवरर्तन कराने के लिए खलीफा पैसा दे रहे हैं। साथ ही चैनल ने हैशटैग चलाकर स्टोरी को वायरल भी किया और एक के बाद कई ट्वीट भी किए। इसके साथ ही लड़कियों के रेट कार्ड से जुड़ा एक ट्वीट भी किया जिसका स्क्रीन शॉट आप नीचे देख सकते हैं।

दूसरी तरफ आल्ट न्यूज का दावा है कि जिस स्टोरी को टाइम्स नाऊ ने स्पेशल कहकर चलाया है वो बहुत पुरानी है। रेट कार्ड की तस्वीरें भी व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से जुटाई गई हैं। रेटकार्ट की असली तस्वीर को नीचे देख सकते हैं।

जबकि इससे पहले फरवरी 2016 में वायरल हुए इस पोस्टर के हवाले से अहमदाबाद मिरर ने एक स्टोरी ‘लव जिहाद इन बड़ोदरा कम विद ए प्राइज टैग’ चलाई। जिसके बाद जी न्यूज, वन इंडिया, दैनिक भास्कर (मराठी) इंडिया डॉट कॉम और सहारा समय ने भी इसे कवर किया। हालांकि बाद में देश के ज्यादातर मीडिया हाउस ने इसे लोगों को भड़काने के लिए फर्जी पोस्टर करार दिया। बाद में खुलासा हुआ कि इस तरह की झूठी न्यूज को वायरल कराने में हिंदुत्व डॉट इन्फो, जागरुक भारत और कट्टर हिंदू संगठन ने अहम योगदान निभाया।

दूसरी तरफ टाइम्स नाउ के जिस प्रोग्राम में इन तस्वीरों को दिखाया गया है उसमें कुछ 2014 की भी तस्वीरें हैं। शिवसेना के समाचार पत्र ‘सामना’ में भी करीब सात साल पहले ये स्टोरी छप चुकी है। जिसे न्यूज पेपर के पेज नंबर पर छह पर जगह दी गई। पेपर का स्क्रीन शॉट आप नीचे देख सकते हैं।


पांच फरवरी, 2015 को भी इससे जुड़ा ब्लॉग ‘सिख और इस्लाम’ चला चुका है। जिसे आप नीचे देख सकते हैं।

 

आल्ट न्यूज ने दावा है कि न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ ने इन्हीं तस्वीरों और हिजबुल के झंडे और साल 2014 और 2016 में वायरल हो रहीं कुछ तस्वीरों के जरिए इस स्टोरी को बनाया है। जोकि फर्जी है।

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