महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में भारी बारिश ने ऐसा हालात पैदा कर दिए कि एक बड़ी चिंता खड़ी हो गई। एचपीसीएल के पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में बाढ़ का पानी घुस गया और देखते ही देखते हजारों गैस सिलेंडर तेज बहाव में बहकर पातालगंगा नदी तक पहुंच गए। इस घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी या समुद्र किनारे मिले किसी भी सिलेंडर को छूने या घर ले जाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

यह घटना रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका के चावणे गांव में स्थित एचपीसीएल पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की है। भारी बारिश के कारण प्लांट परिसर में अचानक पानी भर गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि वहां रखे करीब 3,000 एलपीजी सिलेंडर बह गए। इनमें खाली और गैस से भरे दोनों तरह के सिलेंडर शामिल बताए जा रहे हैं।

प्लांट में रखे करीब 1,200 खाली सिलेंडर भी इस बहाव में बह गए थे। ये सिलेंडर गैस भरने के लिए रखे गए थे और इनमें गैस नहीं थी। अगर इनमें गैस भरी होती तो पानी के तेज बहाव में सिलेंडरों के आपस में टकराने से गैस रिसाव, आग लगने या बड़े हादसे का खतरा बढ़ सकता था।

तेज धारा में भारी भरकम सिलेंडर भी नहीं रुके

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाढ़ का पानी इतनी तेजी से प्लांट में दाखिल हुआ कि कर्मचारियों को सिलेंडरों को सुरक्षित करने का ज्यादा समय नहीं मिल पाया। कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन पानी के तेज दबाव के सामने वे बेबस नजर आए। भारी-भरकम सिलेंडर भी तेज धार में बहते हुए आगे निकल गए और कई सिलेंडर पातालगंगा नदी में पहुंच गए।

घटना के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। जिला कलेक्टर किशन जावले ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को नदी, समुद्र किनारे या आसपास के इलाकों में सिलेंडर दिखाई दें तो उन्हें उठाने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना मुश्किल है कि बहकर आए सिलेंडर में गैस है या नहीं और उनकी स्थिति सुरक्षित है या नहीं। जिज्ञासा या इस्तेमाल के लिए ऐसे सिलेंडर को उठाना, खोलना या घर ले जाना जानलेवा हो सकता है।

प्रशासन ने लोगों को खास तौर पर नदी के आसपास रहने वाले इलाकों में सतर्क रहने को कहा है। किसी भी सिलेंडर को हाथ लगाने के बजाय इसकी जानकारी तुरंत प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को देने की सलाह दी गई है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने इस घटना को लेकर सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं। एक एक्स यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए इसे फिल्मी सीन जैसा बताया और लिखा कि महाराष्ट्र में बाढ़ के पानी में गैस सिलेंडर बहते दिखाई दे रहे हैं।

वहीं, कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि इतने बड़े औद्योगिक प्लांट में बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक घटना की जांच जारी होने की बात कही है और नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है।

फिलहाल एचपीसीएल और स्थानीय प्रशासन मिलकर बहकर गए सिलेंडरों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्लांट को ज्यादा सुरक्षित कैसे बनाया जा सकता है।

महाराष्ट्र के कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग की ओर से भी भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों और तेज बहाव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें और किसी भी जोखिम भरी स्थिति में सावधानी बरतें।

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देश भर में हर साल मानसून का बेसब्री से इंतजार किया जाता है, क्योंकि कृषि, पेयजल, ऊर्जा और गर्मी से राहत के दृष्टिकोण से इसे जीवन का आधार माना जाता है। मगर जब मानसून भारी बारिश के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, तो जीवन की रफ्तार थम जाती है। मैदानों में सड़कों पर जलभराव से यातायात ठप हो जाता है और बाढ़ की वजह से कई लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक