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तस्लीमा नसरीन ने मदर टेरेसा को बताया ‘अपराधी’, लगाए बेहद गंभीर आरोप

पुलिस सूत्रों ने कहा है कि यहां संत टेरेसा द्वारा स्थापित कई होम्स में वर्ष 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराया गया था, लेकिन यहां से केवल 170 नवजात शिशुओं का रिकार्ड मिला और बाकी 280 शिशुओं के बारे में कोई सूचना नहीं मिली।

भारत रत्न मदर टेरेसा की संस्था पर बच्चों को बेचने का आरोप लगा है। (फाइल फोटो)

मासूम बच्चों को बेचने का आरोप झेल रही भारत रत्न मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा है कि मदर टेरेसा चैरिटी होम बच्चों को बेचता रहा है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। तस्लीमा नसरीन ने शांति की नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को बर्बर कृत्यों से जुड़ी रहने वाली कहा है। उन्होंने कहा है कि अपराधियों के पक्ष में सिर्फ इसलिए बयान नहीं देना चाहिए क्योंकि वे प्रसिद्ध हैं। तस्लीमा नसरीन ने कहा, “मदर टेरेसा चैरिटी होम बच्चों को बेचता है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। मदर टेरेसा कई अवैध, अमानवीय, अनैतिक, अनएथिकल, असैद्धांतिक, दुष्ट, धोखाधड़ी और बर्बर कृत्यों से जुड़ी थीं। कृपया सिर्फ इसलिए अपराधियों की रक्षा करने की कोशिश न करें क्योंकि वे प्रसिद्ध हैं।”

बता दें कि झांरखंड की राजधानी रांची में स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी से मानव तस्करी की खबरों से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। मिशनरी ऑफ चैरिटी यहां अपने कई होम्स से 280 महिलाओं द्वारा जन्म दिए गए नवजात शिशुओं के रिकार्ड मुहैया कराने में विफल रही है। पुलिस सूत्रों ने कहा है कि यहां संत टेरेसा द्वारा स्थापित कई होम्स में वर्ष 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराया गया था, लेकिन यहां से केवल 170 नवजात शिशुओं का रिकार्ड मिला और बाकी 280 शिशुओं के बारे में कोई सूचना नहीं मिली। वहीं इस मामले में झारखंड के ईसाई संगठनों का कहना है कि चैरिटी को बदनाम करने के लिए इसे टारगेट किया जा रहा है। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के महासचिव थेडॉर मासकेयरहेन्स कहा कि संस्था को बदनाम करने के लिए साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, “हम निसंतान दंपतियों को शिशुओं को बेचे जाने समेत सभी कोणों से मामले की जांच कर रहे हैं। हमने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के रिकार्ड खंगाले हैं। रिकार्ड में कुछ अनियमितताएं हैं।” यह मामला तब सामने आया, जब मई में चैरिटी से एक नवजात शिशु को गोद लिए एक दंपति ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने शिशु के जन्म और चिकित्सा देखभाल के लिए 1.20 लाख रुपये चुकाए थे, लेकिन चैरिटी ने यह आश्वासन देकर उनसे बच्चा वापस ले लिया कि अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चा लौटा दिया जाएगा। बच्चा वापस लेने में अक्षम रहने पर दंपति ने इसकी शिकायत चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी को कर दी। पुलिस के अनुसार, यह मानव तस्करी से संबंधित मामला है और वे इसकी जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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