गुजरात के सूरत से दिल दुखाने वाली खबर सामने आई है, यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में 30 साल के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कथित तौर पर रैगिंग के बाद अपनी जान जे दी। मामले में अधिकारियों ने बताया कि कॉलेज प्रशासन की ओर से रातभर जारी जांच के बाद चार सीनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया, जबकि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख समेत चार संकाय सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

मृतक की पहचान हर्ष पांड्या के रूप में हुई है, जो न्यू सिविल अस्पताल से संबद्ध जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीजी प्रथम वर्ष के छात्र थे। वे रविवार सुबह छात्रावास के कमरे में फंदे से लटके पाए गए। जीएमसी के डीन डॉ. जयेश ब्रह्मभट्ट ने बताया कि उनकी मौत की जांच करने वाली रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ छात्रों ने उन्हें भला-बुरा कहा था और अपमानित किया था।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि घटना की वैज्ञानिक तरीकों से गहन जांच की जा रही है। मृतक के पिता खुद भी डॉक्टर हैं, उन्हें न्याय का भरोसा दिया गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रैगिंग की घटना में शामिल पाए गए चार वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों- निराली वसावे, अनुज माहेश्वरी, दीक्षिता गेवड़िया और हिना भट को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

कारण बताओ नोटिस हुआ जारी

डॉ. ब्रह्मभट्ट ने कहा कि इन सभी को तुरंत छात्रावास खाली करने और इस दौरान किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं होने का आदेश दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुमैया मुल्ला और तीन अन्य संकाय सदस्यों-डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

बयान के अनुसार, रैगिंग रोधी समिति ने रविवार रात साढ़े आठ बजे से सोमवार सुबह चार बजे तक लंबी बैठक की। इस दौरान प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों और मृतक के पिता की शिकायतों के आधार पर वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों, संकाय सदस्यों, तकनीशियनों और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सफाई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।

रैंगिग का करना पड़ा सामना

डॉ. ब्रह्मभट्ट ने कहा, ”प्रथम वर्ष के छात्रों की शिकायतों के आधार पर द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों तथा संकाय सदस्यों के बयान दर्ज किए गए। इन बयानों पर विचार करने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों में रैगिंग की परिभाषा में मौखिक दुर्व्यवहार और अपमान को शामिल किए जाने के आधार पर समिति ने निष्कर्ष निकाला कि पांड्या को रैगिंग का सामना करना पड़ा।”

उन्होंने आगे कहा, ”इस मामले में मौखिक दुर्व्यवहार और अपमान की पुष्टि हुई है, लेकिन किसी भी शिकायत में शारीरिक उत्पीड़न का उल्लेख या प्रमाण नहीं मिला।” डीन ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि रैगिंग रोधी समिति की रिपोर्ट को कॉलेज परिषद ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इसकी समीक्षा भी की गई है। मामले में राज्य सरकार को आधिकारिक रिपोर्ट सौंप दी गई और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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