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पार्टी छोड़ने की उड़ रही थी अफवाह, सपा प्रवक्ता बोलीं- किसी में ताकत नहीं जो मुझे अखिलेश यादव से अलग कर सके

सपा प्रवक्ता ने ट्वीट में आगे लिखा है कि वह मरते दम सक अखिलेश के साथ रहेंगी। वह अखिलेश यादव का समर्थन करती हैं।

ने उन सभी खबरों को निराधार बताया है जिसमें कहा गया था कि उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। (photo source twitter)

समाजवादी पार्टी (एसपी) छोड़ने की अफवाहों पर पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने सफाई दी है। पाठक ने उन सभी खबरों को निराधार बताया है जिसमें कहा गया था कि उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। मामले में खुद सफाई देते हुए सपा प्रवक्ता ने ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘कुछ लोग मेरे समाजवादी पार्टी छोड़ने की झूठी खबर उड़ा रहे हैं और कुछ लोग उस पर खुशी मना रहे हैं। बस इतना जान लीजिए कि इस दुनिया में कोई ऐसी ताकत नहीं है जो मुझे समाजवादी विचारधारा और मेरे नेता माननीय अखिलेश यादव जी से अलग कर सके।’ सपा प्रवक्ता ने ट्वीट में आगे लिखा है कि वह मरते दम सक अखिलेश के साथ रहेंगी। वह अखिलेश यादव का समर्थन करती हैं। पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट के साथ दो तस्वीरें भी शेयर की है। इसमें एक तस्वीर में वह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ हैं जबकि दूसरी तस्वीर में वह डिंपल यादव के साथ हैं।

बता दें कि सपा प्रवक्ता की पार्टी छोड़ने की खबरें तब सोशल मीडिया में वायरल होने लगी जब उनके नाम से एक पोस्ट वायरल हुई। पोस्ट में मुस्लिमों पर तंज कसा गया। लिखा गया कि वह एग्जाम देने के लिए घर से निकली लेकिन तीस मिनट तक जाम फंसी रहीं। ऐसा इसलिए था क्योंकि सड़क पर नमाज पढ़ी जा रही थी। पोस्ट में आगे लिखा गया कि धर्म के नाम पर जनता को इस तरह से असुविधा देना सही नहीं हो सकता। इतनी गर्मी में लोग टू और थ्री व्हीलर पर घंटों से जाम में फंसे हैं। छोटे बच्चे भी जाम में फंसे हैं। आज परीक्षा छूट ही जाएगी। क्या यह अधिकारों का हनन नहीं है?

सपा प्रवक्ता के ट्वीट पर अन्य यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं भी दी हैं। एक ट्वीट में वसीम खान लिखते हैं, ‘जनता में बने रहने का प्लान। 1- पहले मुसलमानों के खिलाफ बोले। 2- जब एक्शन का रिएक्शन आए तो रोओ।’ अश्विनी तिवारी लिखते हैं, ‘इनकी वजह से कई मुस्लिम पीएम मोदी के कामों की सराहना नहीं करते हैं। इन नेताओं को हम लोगों ने आपस में लड़ाया है।’ उजैर खान लिखते हैं, ‘आपकी विचारधार कहीं से समाजवादी हनीं है। जिसको नमाज से तकलीफ है वो कहीं से समाजवादी हो नहीं सकता।’

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