ये लोग पूरे देश को मंदिर और युवाओं को साधू बना देंगे- इंजीनियरिंग में रामायण महाभारत को शामिल कर ट्रोल हो रही शिवराज सिंह चौहान की BJP सरकार

इस निर्णय पर सरकार का कहना है कि तकनीकी शिक्षा में सांस्कृतिक सिद्धांतों को जोड़ने के प्रयास के तहत या निर्णय लिया गया है।

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एमपी सीएम शिवराज सिंह चौहान (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने फैसला लिया है कि अब राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में महाभारत और रामायण महाकाव्य को शामिल किया जाएगा। इस निर्णय पर सरकार का कहना है कि तकनीकी शिक्षा में सांस्कृतिक सिद्धांतों को जोड़ने के प्रयास के तहत या निर्णय लिया गया है। नए पाठ्यक्रम में भगवान राम पर विशेष जोर दिया गया है।

मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय पर सोशल मीडिया पर लोग अपनी प्रतिक्रिया के जरिए शिवराज सिंह सरकार को रोल करते नजर आ रहे हैं। @Nehathink टि्वटर हैंडल से इस खबर पर लिखा गया कि देश को पूरा मंदिर बनाया जाएगा। सब साधु बनेंगे, फिर ना रोजगार की जरूरत होगी न किसी और न ही सुविधा की। एक ट्विटर यूजर ने इस खबर पर लिखा कि तो फिर धोती कुर्ता भी अनिवार्य कर दिया जाए।

@aawarasonu टि्वटर अकाउंट से कमेंट किया गया कि अरे शिवराज सिंह चौहान जी कॉलेजों में रामायण, महाभारत, कुरान और बाइबिल सब पढ़ाई है लेकिन पढ़ाने के बाद नौकरी तो दीजिए। पढ़-पढ़ के बच्चे ओवरेज हो रहे हैं और आप नई नई घोषणाएं करने में व्यस्त हैं। एक टि्वटर हैंडल से मजा लेते हुए लिखा गया कि मैकेनिकल में पुष्पक विमान… सिविल इंजीनियरिंग में रामसेतु पढ़ाया जाएगा और आईटी में संजय।

आशीष चौक से नाम के एक ट्विटर यूजर सवाल पूछते हुए लिखते हैं कि रामायण महाभारत पड़ा ना तो ठीक है लेकिन पढायेंगे क्या? असलियत या फिर उसका भी संशोधित प्रारूप। ArshadK92030805 टि्वटर हैंडल से लिखा गया कि यह इसलिए किया गया है कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ पढ़ने से कोई फायदा तो है नहीं जॉब तो यह देंगे नहीं। रामायण इसलिए पढ़ा दे रहे हैं कि कम से कम तीर बाण चलाना तो सीख ही जाएं। एक टि्वटर यूजर लिखते हैं कि लगे हाथ शिवराज सिंह सरकार गेरुआ ड्रेस भी लागू कर दे।

विक्रांत सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ऐसे निर्णय भारत के लिए खतरा हैं। अंधभक्ति में अपने बच्चों का कल न बिगाड़े। इसका असर आज नहीं कल पता चलेगा। संस्कृति पारंपरिक तरीके से बढ़ती है। इसे परिवार के माध्यम से बढ़ाना चाहिए, इंजीनियरिंग की पढ़ाई से नहीं।

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