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तीन तलाक खत्म होने पर भावुक हुई शाजिया इल्मी, टीवी पर नहीं रोक पाई अपने आंसू

कई बार टीवी डिबेट में खुल कर तीन तलाक के खिलाफ बोलने वाली शाजिया इल्मी कोर्ट के फैसले के बाद अपने आंसू नहीं रोक पाई और भरे गले से उन्होंने कोर्ट का धन्यवाद दिया।

शाजिया इल्मी बीजेपी से जुड़ी हुई हैं।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिमों में एक बार में तीन बार तलाक बोलकर दिए जाने वाले तलाक की प्रथा ‘अमान्य’, ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ है। शीर्ष अदालत ने 3:2 के मत से फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को खारिज कर दिया है। साथ ही तीन तलाक को कुरान के मूल तत्व के खिलाफ बताया। इस विषय पर सालों से संघर्ष कर रही कई मुस्लिम महिलाएं मीडिया पर अपनी बात रखती हुई भावुक हो गईं हैं। ऐसी ही एक टीवी डिबेट पर बात करते हुए बीजेपी नेता शाजिया इल्मी बेहद भावुक हो गई। अपनी बात रखते हुए उनका गला भर आया, आंखों में से आंसू भी निकल आए। शाजिया इल्मी ने कहा कि, सायरा बानों और उनके जैसी कई औरतें जो दर दर भटक रही है। जिन्हें फोन, एसएमएस के जरिए तलाक मिलता है। आज के दिन उसकी जिदंगी में कितनी अहमियत है। इस तरह की महिलाओं ने काफी बर्दाश्त किया है। मैं काफी छोटी थी एक खाला थी उनकी बेटी थी उन्हें उनके शौहर ने ऐसे ही छोड़ दिया था। सोचिए आज का दिन उनकी जिंदगी में कितना अहम है।

इससे पहले मंगलवार सुबह फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुये सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाये जबकि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस प्रथा को संविधान का उल्लंघन करने वाला करार दिया। बहुमत के फैसले में कहा गया कि तीन तलाक सहित कोई भी प्रथा जो कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है, अस्वीकार्य है। तीन न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि तीन तलाक के माध्यम से विवाह विच्छेद करने की प्रथा मनमानी है और इससे संविधान का उल्लंघन होता हैं। इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश खेहर और न्यायमूर्ति नजीर ने अल्पमत के निर्णय में तीन तलाक की प्रथा को छह महीने स्थगित रखने की हिमायत करते हुये राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने मतभेद परे रखते हुये केन्द्र को इस संबंध में कानून बनाने में सहयोग करें। अल्पमत के निर्णय में यह भी कहा गया कि यदि केन्द्र छह महीने के भीतर कानून नहीं बनाता है तो तीन तलाक पर यह अंतरिम रोक जारी रहेगी। प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति नजीर ने उम्मीद जताई कि केन्द्र का कानून मुस्लिम संगठनों की ंिचता और शरिया कानून को ध्यान में रखेगा। इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ में विभिन्न धार्मिक समुदाय-सिख, ईसाई, पारसी, हिन्दू और मुस्लिम- के न्यायाधीशों ने तीन तलाक की प्रथा को चुनौती देने वाली पांच मुस्लिम महिलाओं की याचिका सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

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