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शबाना आजमी ने निकाह पर किया ट्वीट, जवाब मिला- दूसरे का घर तोड़ने वाली क्‍या जाने तलाक का दर्द!

पिछले सप्ताह उन्होंने तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि यह निर्णय देश में बहादुर मुस्लिम महिलाओं की जीत है।

Author August 30, 2017 1:00 PM
शबाना एक समाजिक कार्यकर्ता हैं और वह मिजवान वेलफेयर सोसाइटी नामक एनजीओ चलाती हैं। (File Photo)

अभिनेत्री शबाना आजमी का मानना है कि इस्लाम में जन्नत में निकाह तय नहीं होते, बल्कि यह तो एक अनुबंध की तरह होता है। उत्तर प्रदेश के मदरसों में तलाक के सही तरीके सिखाने के लिए लेख साझा करते हुए शबाना ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा, “इस्लाम में निकाह कोई जन्नत में तय नहीं होता। यह एक अनुबंध है। हमें एक आदर्श ‘निकाहनामा’ की जरूरत है, जो सच्चे मन से तैयार किया गया अनुबंध हो।”

लेखक-गीतकार जावेद अख्तर की पत्नी शबाना हमेशा से सामाजिक मुद्दों पर मुखर रही हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि यह निर्णय देश में बहादुर मुस्लिम महिलाओं की जीत है। शबाना ने मंगलवार (22 अगस्त) को ट्वीट किया, “मैं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन तलाक पर दिए गए फैसले का स्वागत करती हूं। यह उन बहादुर मुस्लिम महिलाओं की जीत है, जिन्होंने कई सालों तक इसके खिलाफ लड़ा है।”

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शबाना एक समाजिक कार्यकर्ता हैं और वह मिजवान वेलफेयर सोसाइटी नामक एनजीओ चलाती हैं। इसके अलावा वह बाल विकास, एड्स और न्याय दिलाने के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने कई नाटकों में सांप्रदायिकता के खिलाफ भी आवाज उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले, प्रवासी कश्मीरी पंडितों और लातूर में आए भूकंप पीड़ितों के लिए काम किया है। साल 1993 में हुए मुंबई दंगों ने उन्हें हिला कर रख दिया था और वह धार्मिक चरमपंथ की एक मजबूत आलोचक के रूप में उभरीं।

सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक पर 3:2 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया कि मुस्लिम समुदाय की तीन तलाक की परंपरा ‘असंवैधानिक’, ‘एकतरफा’ और ‘इस्लाम का हिस्सा’ नहीं है। साथ ही इसपर कोर्ट ने छह महीने के भीतर सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया। इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया। बेंच में जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आरएफ नरीमन, यूयू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।

देखिए वीडियो - SC ने तीन तलाक को रद्द किया, बताया असंवैधानिक

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