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वायरल वीड‍ियो: 12 घंटे काम के बाद नमक भी नसीब नहीं, पानी के साथ खाई रोटी

भारत रोज बड़ी संख्या में भूखे सोने वाले लोगों का भी देश है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स की साल 2017 की रिपोर्ट में भारत का दर्जा 119 देशों की सूची में 100वें नंबर पर आता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर रोज 190 मिलियन लोग भूखे पेट सो रहे हैं।

पानी के साथ रोटी खाते हुए बुजुर्ग का मार्मिक वीडियो। फोटो- Facebook/ Video Screen Shot (Vasant Christy)

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक मार्मिक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गार्ड की वर्दी पहने हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति खाना खाते हुए दिख रहा है। इस वीडियो में साफ दिखता है कि खाना खाने वाला शख्स अपने एक हाथ में रोटी पकड़े हुए जबकि दूसरे हाथ से खाना खा रहा है। सामने उसकी थाली में पानी भरा हुआ है। जिसमें डुबोकर बुजुर्ग व्यक्ति चुपचाप खाना खा रहा है।

इस मार्मिक वीडियो को फेसबुक पर वसंत क्रिस्टी नाम के शख्स ने पोस्ट किया है। यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कृपया भोजन को बर्बाद न करें। 12 घंटे की नौकरी के बाद भी अंकल पानी के साथ रोटी खा रहे हैं। लोग लगातार इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं। कई यूजर्स इस वीडियो को फॉरवर्ड करने के साथ ही लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि खाने को बर्बाद न करें। जो खाना वह कूड़े के ढेर में फेंक रहे हैं वह कई भूखे लोगों के पेट को भर सकता है।

इस मार्मिक वीडियो को फेसबुक पर 30 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। जबकि करीब 56 हजार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं और 11 हजार से ज्यादा लोग अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। इसके बावजूद ये वीडियो कब का है और कहां का है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके अलावा खाना खा रहे शख्स की भी पहचान नहीं हो सकी है।

वैसे बता दें कि भारत रोज बड़ी संख्या में भूखे सोने वाले लोगों का भी देश है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स की साल 2017 की रिपोर्ट में भारत का दर्जा 119 देशों की सूची में 100वें नंबर पर आता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर रोज 190 मिलियन लोग भूखे पेट सो रहे हैं। देश के 3000 से ज्यादा गरीब बच्चे तो सिर्फ खाने की खराब गुणवत्ता के कारण ही रोज दम तोड़ जाते हैं। सरकारी योजनाओं के बावजूद भी लोगों के पास पर्याप्त संख्या में उचित गुणवत्ता का पुष्टाहार न पहुंच पाना इसका प्रमुख कारण है। यही वजह है कि आजादी के इतने सालों बाद भी देश में भुखमरी से होने वाली मौतें हमारे लिए शर्म और चिंता का कारण बनी हुईं हैं।

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