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गौरी लंकेश की हत्‍या पर बोले रवीश कुमार- कल मेरी भी हालत खराब थी, घरवाले कहते हैं बोलना छोड़ दीजिए

पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार से इंडियन एक्सप्रेस ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बातचीत की।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार। (फाइल फोटो)

कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में पांच सितंबर को वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से आक्रोशित दिल्ली के सैकड़ों पत्रकारों ने बीते बुधवार (6 सितंबर) को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में विरोध प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने गौरी के लिए इंसाफ की मांग की और असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रहीं ताकतों से डटकर मुकाबला करने की बात कही। वहीं पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार से इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर उनसे बातचीत की। बातचीत में रवीश ने कहा, ‘अगर में कहूं कि मुझे डर नहीं लगता तो ये झूठ बोलना होगा। क्योंकि हम रोज डरते हैं और रोज ही उस डर को जीतते की कोशिश करते हैं। मैं जो बोलता हूं उसे बोलने से मुझे डर नहीं लगता। जो लोग आयकर विभाग और सीबीआई के दम पर सरकार चलाते हैं डर उन्हें भी लगता है। बहुत सारे मुद्दों पर उनकी भी हालत खराब हो जाती है। कल मेरी भी हालत खराब थी। इस डर से मेरे आसपास के लोग कहते हैं कि बोलना छोड़ दीजिए। ऐसा क्या है जिसे भारत की जनता बर्दाश्त नहीं कर सकती। सोशल मीडिया के जरिए लगातार जहर फैलाया जा रहा है। सरकार ने अपनी सारी शक्तियों को आउट सोर्स कर दिया है। पहले जब कोई बड़ा नेता होता था तो उसपर कोई दाग नहीं होता था। गंदा काम तो बाहुबली लोग कर लेते थे। यही आजकल के बाहुबली हैं जिनमें एंकर हैं। ये दस बारह एंकर आज बाहुबली की भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया में इनके इतने समर्थक है जो किसी के मरने पर भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वो कहता है मैंने किसी का नाम नहीं लिखा था।’

पत्रकार रवीश ने आगे कहा कि जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं वो पत्रकार की मौत पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है। पत्रकार को ऐसे लोगों के खिलाफ लिखते रहना पड़ेगा। लेकिन आज दस बारह एंकर्स ने लोगों की आवाज को दबा दिया। गौरतलब है कि बातचीत में रवीश ने मीडिया को गोदी मीडिया का नाम दिया जो कथित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के लिए काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज खबरों की चाल बदल गई है। सीधे कहने की बजाए हम दाएं-बाएं बोल रहे हैं। इसके लिए हमें अपनी आवाज बुलंद करने के लिए लिखते रहना पड़ेगा।

बता दें कि बीती मंगलवार (पांच सितंबर) रात करीब आठ बजे कुछ लोगों ने पत्रकार गौरी लंकेश की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्होंने अपने कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका में पिछले तीन महीनों में केंद्र सरकार और उसके नेताओं की आलोचना में कम से कम आठ लेख प्रकाशित किए थे। लंकेश ने अपने आखिरी साप्ताहिक स्तम्भ में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बच्चों की मौत और डॉक्टर कफील खान को हटाए जाने के खिलाफ लिखा था। दूसरी तरफ पत्रकार और एक्टिविस्ट गौरी लंकेश ने हत्या से पिछले चौबीस घंटों में अपने ट्विटर और फेसबुक पर रोहिंग्या मुसलमानों, नोटबंदी के नुकसान, भारतीय अभिभावकों को समलैंगिकता के बारे में जागरूक करने वाले यूट्यूब वीडियो और केंद्र की नरेंद्र मोदी की आलोचना से जुड़े पोस्ट किए थे।

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