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आरएसएस के कार्यक्रम में गए प्रणब मुखर्जी की तस्वीर से छेड़छाड़, बेटी शर्मिष्ठा बोलीं- देखो, क्या कहा था

प्रणब के इस दौरे को लेकर कुछ कांग्रेसी नेताओं ने खासा असंतोष जाहिर किया था। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति की बेटी और दिल्ली कांग्रेस महिला विंग की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी उन्हें 'आगाह' किया था।

जानें, पिता की छेड़छाड़ की गई तस्वीरों पर क्या बोलीं बेटी। (फोटोः पीटीआई/फेसबुक)

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पहुंचे। मुखर्जी के इस दौरे पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं। सब यह जानने के लिए उत्सुक थे कि पूरी जिंदगी बतौर कांग्रेसी नेता आरएसएस की विचारधारा का विरोध करने वाले प्रणब मुखर्जी यहां क्या बोलेंगे? आरएसएस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति ने भारत की बहुलतावादी संस्कृति का बखान किया। बता दें कि प्रणब के इस दौरे को लेकर कुछ कांग्रेसी नेताओं ने खासा असंतोष जाहिर किया था। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति की बेटी और दिल्ली कांग्रेस महिला विंग की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी उन्हें ‘आगाह’ किया था।

पूर्व राष्ट्रपति के संघ मुख्यालय के कार्यक्रम में पहुंचने के कुछ देर बाद ही एक मॉर्फ्ड तस्वीर सामने आई। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच पर मौजूद प्रणब आरएसएस की काली टोपी पहने नजर आए। इसके अलावा, वह संघ की प्रार्थना के वक्त स्वयंसेवक की तरह सीने के सामने हाथ उठाए नजर आए।

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असल में प्रणब ने ऐसी कोई टोपी नहीं पहनी। प्रार्थना के वक्त वह बस सावधान की मुद्रा में खड़े भर थे। इस तस्वीर को शेयर कर शर्मिष्ठा ने कहा, ‘देखिए, इसी बात का मुझे डर था और अपने पिता को इस बारे में आगाह किया था। अभी कुछ घंटे ही नहीं बीते हैं, लेकिन बीजेपी/आरएसएस का डर्टी ट्रिक डिपार्टमेंट पूरी तरह काम में जुट गया है।’

बता दें कि शर्मिष्ठा ने अपने पिता के संघ मुख्यालय जाने को लेकर एक दिन पहले ही आगाह किया था। उन्होंने आशंका जताई थी कि लोग यह भूल जाएंगे कि प्रणब ने इस कार्यक्रम में क्या कहा था और उन्हें बस तस्वीरें याद रह जाएंगी। शर्मिष्ठा ने अपने बीजेपी में जाने की खबरों का भी खंडन किया था।

उधर, गुरुवार को आरएसएस के कार्यक्रम में पहुंचे प्रणब मुखर्जी ने प्रतिस्पर्धी हितों में संतुलन बनाने के लिए बातचीत का मार्ग अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि नफरत की वजह से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान कमजोर पड़ जाएगी। प्रणब ने कहा, “मैंने महसूस किया है कि भारत बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसता है।”

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