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एससी-एसटी आयोग ने मानव संसाधन मंत्रालय से पूछा-जब दलितों को आरक्षण नहीं तो फिर AMU को ग्रांट क्यों?

एससी-एसटी आयोग ने मानव संसाधन मंत्रालय से पूछा कि जब दलितों को आरक्षण नहीं दिया जा रहा है तो फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को ग्रांट क्यों मिल रहा है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी। (express photo by gajendra yadav)

जिन्ना विवाद के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक नया विवाद शुरू हो गया है। यह विवाद है आरक्षण लागू करने का। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अभी तक अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह एससी-एसटी छात्रों को आरक्षण नहीं मिलता है। इस बाबत एससी-एसटी कमीशन ने एचआरडी मंत्रालय को एक पत्र लिखा है और पूछा कि एएमयू को आखिर केंद्रीय ग्रांट क्यों दिया जा रहा है, जब विश्वविद्यालय एससी और एसटी को आरक्षण ही नहीं दे रहा है।

बता दें कि राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी आरक्षण नीति को लागू करवाने की तैयारी पूरी तैयारी कर ली है। आयोग के चेयरमैन राम शंकर कठेरिया ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा था कि एएमयू अधिकारियों से तीन जुलाई को हुई बैठक में रजिस्ट्रार और कुलपति एक ऐसा दस्तावेज नहीं दिखा पाए जो यह साबित कर सके कि यह एक अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय है। उन्हें दस्तावेज पेश करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। अगस्त महीने तक या तो वे दस्तावेज जमा करें या फिर अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह आरक्षण नीति को लागू करें। कठेरिया ने यह भी दावा किया कि आरक्षण नहीं देने की वजह से 1951 से लेकेर अबतक एससी, एसटी और ओबीसी के करीब पांच लाख छात्र यहां दाखिले से वंचित हुए।

 

गौर हो कि इससे पहले तीन जुलाई को भाजपा नेता और अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने भी एएमयू में एससी, एसटी और ओबीसी को अारक्षण देने की मांग कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भी इसकी वकालत करते हुए कहा था कि जब सभी विश्वविद्यालयों में पिछड़े तबके के छात्रों को आररक्षण मिलता है तो एएमयू में क्यों नहीं? केंद्र सरकार ने भी इस बाबत 2016 में ही अपना रूख स्पष्ट कर दिया था कि वह एएमयू को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं मानती। वहीं, दूसरी ओर एएमयू के अधिकारी का कहना है कि विश्वविद्यालय की दाखिले की नीति का मामला इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। हमारे यहां एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का कोई नियम नहीं है। हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करेंगे।

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