सत्य निकेतन हादसे के मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय का एक 19 साल का छात्र आदित्य फंसा हुआ था। उसने अपने परिवार को फोन कर खुद को बचाने की गुहार लगाई। लोग उसकी हिम्मत को दाद दे रहे हैं। बिहार के रहने वाले बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र आदित्य ने पांच मंजिला इमारत के ढहने के तुरंत बाद करीब दो बजे पटना में अपनी बहन को फोन किया। हालांकि उसे चार घंटे बाद मलबे से निकाल लिया गया, लेकिन उसके परिवार ने उसे बचाने में लगे वक्त को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रविवार को ढही इस इमारत में कई मौत हो गई और कई छात्र घायल हो गए। सत्य निकेतन स्थित पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में केवल चार दिन पहले ही रहने आए युवक के लिए यह चार घंटे का इंतजार कष्टदायक था।
“मैं मलबे में फंसा हुआ हूं”
छात्र के पिता राजू कुमार के अनुसार, उसने अपनी बहन से कहा, “मैं मलबे में फंसा हुआ हूं। मैंने किसी तरह अपने मोबाइल से फोन किया है और मेरे मोबाइल की बैटरी खत्म होने वाली है, कृपया मुझे बचा लो।” आदित्य जीवित बच गया और फिलहाल एम्स में उसका इलाज चल रहा है, लेकिन उसका परिवार इस बात पर सवाल उठा रहा है कि मलबे के नीचे से उसके होश में होने और बात करने में सक्षम होने के बावजूद उसे बाहर निकालने में लगभग चार घंटे क्यों लग गए।
राजू ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”वह इस पीजी में बमुश्किल चार दिनों से रह रहा था। वह सबसे ऊपरी मंजिल पर रह रहा था और इसलिए इमारत ढहने के बाद वह मलबे में बहुत गहराई में नहीं दबा, जो मुझे लगता है कि मेरे बेटे के बचने का कारण है।” दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास यह इमारत रविवार करीब 1.30 बजे उस समय ढह गई जब इसमें मरम्मत का काम चल रहा था।
राहत पीड़ा में बदल गई
दशकों पुरानी इस संरचना से कई लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से सात कई की मौत हो गई, जबकि अन्य घायल हो गए। आदित्य करीब दो महीने पहले दिल्ली आया था और शुरुआती दिनों में लक्ष्मी नगर में रह रहा था। पटना में एक डाकघर में काम करने वाले उसके पिता ने कहा कि आदित्य का फोन आने पर परिवार को शुरुआत में राहत मिली, लेकिन उसे बाहर निकाले जाने का इंतजार करते-करते यह राहत जल्द ही पीड़ा में बदल गई।
उसके पिता ने कहा कि होश में रहने और लगातार मदद के लिए चिल्लाने के बावजूद आदित्य को लगभग चार घंटे बाद बचाया जा सका। राजू ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें उसे बाहर निकालने में इतना समय क्यों लगा। वह सबसे ऊपरी मंजिल पर था और फोन करने के लिए पर्याप्त होश में था। गनीमत रही कि मेरे बेटे की जान नहीं गई, लेकिन उनलोगों का क्या जो उसके नीचे थे?”
छात्र ने बनाई वीडियो
बचाए जाने का इंतजार करते हुए आदित्य ने मलबे के अंदर से एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उस खौफनाक स्थिति की झलक मिलती है, जिसमें वह और एक अन्य शख्स फंसे हुए थे। वीडियो में, कंक्रीट की सिल्लियों के नीचे एक पतली जगह में लेटे छात्र के धूल से सने चेहरे के एक तरफ खून लगा हुआ देखा जा सकता है। उसके कपड़े और चेहरा सीमेंट और धूल से ढके हुए हैं और उसका मोबाइल कैमरा उसके आसपास की दम घोंटने वाली जगह को दर्ज कर रहा है।
यह वीडियो कथित तौर पर आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज के एक छात्र ने एक सोशल मीडिया समूह में शेयर किया था। पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जबकि मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए गए हैं। इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को सोमवार को राजस्थान के भिवाड़ी इलाके से पकड़ा गया।
