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अपने ‘बाप’ के नाम पर वोट मागों, बालासाहेब के नाम पर नहीं- बागी विधायकों पर आगबबूला हुए संजय राउत, यूजर्स ने कर दी खिंचाई

बागी विधायकों पर भड़कते हुए शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि शिवसेना के बाप, हमारे बाप यानि बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट ना मांगे। अपने बाप के नाम पर वोट मांग लो।” 

Sanjay Raut| Shiv Sena| Maharashtra Politics
शिवसेना नेता संजय राउतः Photo Credit- Express Archives

महाराष्ट्र में खड़ा हुआ सियासी बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक विवाद सामने आ रहे हैं। बागी विधायक गुवाहाटी से उद्धव सरकार को ललकार रहे हैं तो मुंबई से शिवसेना के नेता, बागी विधायकों को चुनौती दे रहे हैं। इसी बीच 25 जून को मुंबई में शिवसेना की कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में कई फैसले लिए गए।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा है कि “हम बागियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। बागियों का हिसाब किया जाएगा। शाम तक उनका हाल लोगों को पता चल जाएगा।” संजय राउत ने यह भी कहा है कि ‘जिन्होंने अपनी राजनीति के लिए बालासाहेब के नाम का इस्तेमाल किया, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।’

संजय राउत ने कहा कि ‘जो लोग हमें छोड़कर गए हैं वो लोग शिवसेना के नाम पर वोट ना मांगे। अगर मांगना है तो अपने बाप के नाम पर वोट मांगे। शिवसेना के बाप, हमारे बाप यानि बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट ना मांगे। अपने बाप के नाम पर वोट मांग लो।” 

लोगों की प्रतिक्रियाएं: सुनीत नाम के यूजर ने लिखा कि ‘संजय जी भूल गए क्या? उद्धव ठाकरे ने नरेंद्र मोदी जी के नाम पर वोट मांगे, तब जाकर उनके कुछ विधायक बन पाए।’ महेश पटेल नाम के यूजर ने लिखा कि ‘संजय राउत का घमंड दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, कहते है ना विनाश काले विपरीत बुद्धि, परिस्थिति को कैसे संभालना है ये उनको नहीं आता।’

नंदन नाम के यूजर ने लिखा कि ‘आपने खुद नरेंद्र मोदी जी के नाम पर वोट लिए और दूसरों को नसीहत दे रहे हो।’ शशांक सिंह ने लिखा कि ‘जो लोग शिवसैनिक के रूप में विरोध और तोड़फोड़ कर रहे हैं, वह लोग शिवसैनिक नहीं बल्कि एनसीपी के समर्थक हैं। शिवसेना के समर्थक तो पहले ही शिंदे साहब के हो गए हैं।’ विक्रम सिंह ने लिखा कि ‘मोदी जी और देवेंद्र फडणवीस जी के नाम पर वोट मांग कर सत्ता हासिल करने वाले लोग आज ज्ञान बांट रहे।’

बता दें कि शिवसेना विधायकों का एक बड़ा गुट एकनाथ शिंदे के साथ बागी हो गया और अब उद्धव ठाकरे को सीधी चुनौती दे रहा है। हालांकि अब पार्टी के इस बड़े डैमेज को कंट्रोल करने के लिए उद्धव ठाकरे हर संभव कोशिश कर रहे है और हर हथकंडा अपना रहे हैं।

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