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पोस्‍टरों के जरिए अखिलेश गुट का संदेश: मुलायम खुद मार्गदर्शक बन जाएं, बेटे पर विश्‍वास रखें

अखिलेश ने चुनाव आयोग के फैसले के बाद मुलायम से मुलाकात की थी।

Mulayam Singh Yadav, Mulayam Singh-Akhilesh Yadav, Akhilesh Yadav, Akhilesh-Mulayam fiasco, Samajwadi Party, Samajwadi Party AD, Samajwadi Party Poster, Uttar pradesh Election, Sunil Singh Sajan, India, Jansattaसमाजवादी पार्टी के एक विधानपरिषद सदस्‍य द्वारा यह पोस्‍टर शेयर किए गए हैं। (Source: Facebook)

समाजवादी पार्टी और ‘साइकिल’ चुनाव चिन्‍ह पर अधिकार पाने के बाद अखिलेश यादव अपने पिता, मुलायम सिंह यादव से रिश्‍ते बेहतर करना चाहते हैं। इसकी झलक पार्टी द्वारा जारी किए गए कुछ पोस्‍टरों, बैनरों, सोशल मीडिया विज्ञापनों में देखने को मिल रही है। इन विज्ञापनों में मुलायम सिंह यादव की तस्‍वीर बड़ी लगाई गई है और ज्‍यादा स्‍पेस दिया गया और अखिलेश को कम। इसके साथ नीचे स्‍लोगन लिखा है ”विश्‍वास रखें, विकास रुकेगा नहीं, यूपी झुकेगा नहीं, वादा है आपके अखिलेश का” वहीं दूसरे में कहा गया है, ”आपकी साइकिल सदा चलेगी आपके नाम से, फिर प्रदेश का दिल जीतेंगे हम मिलकर अपने काम से।” गौरतलब है कि अखिलेश ने चुनाव आयोग के फैसले के बाद मुलायम से मुलाकात की थी। उन्‍होंने कहा था कि ‘मेरे पिता को नीचा दिखाने वाली किसी जीत में खुशी नहीं… लेकिन यह लड़ाई जरूरी थी।” अखिलेश ने कहा, ”वह मेरे पिता हैं…और चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद मैं सीधे उनसे मिलने गया। मैं उनका आशीर्वाद लेने गया था।”

अखिलेश ने सोमवार को अपनी और मुलायम की आमने-सामने बैठे एक तस्‍वीर ट्वीट की थी, जिसके साथ उन्‍होंने लिखा था, ”साइकिल चलती जाएगी…आगे बढ़ती जाएगी…” उन्‍होंने मंगलवार को अपने पिता, मुलायम सिंह यादव के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश की। अखिलेश ने 12 घंटों में मुलायम से दो बार मुलाकात की। मंगलवार को मुलायम ने अखिलेश यादव को 38 ऐसे प्रत्‍याशियों की सूची सौंपी है जिन्‍हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। हालांकि इस सूची से मुलायम सिंह के भाई और उनके भरोसेमंद, शिवपाल यादव का नाम गायब है।

यादव परिवार में महीनों से पार्टी पर कब्‍जे की लड़ाई चल रही है। मामला गंभीर तब हो गया जब मुलायम सिंह और शिवपाल के महीनों तक मुख्‍यमंत्री को प्रत्‍याशियों का चयन करने से रोके रखा। उधर, अखिलेश ने अपने चाचा रामगोपाल के साथ मिलकर अपने उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर दी और पार्टी की बैठक बुलाकर खुद को समाजवादी पार्टी का नया अध्‍यक्ष घोषित कर दिया। मुलायम सिंह को ‘मागदर्शक’ का पद देकर उन्‍हें संन्‍यास की तरफ ढकेल दिया गया।

दोनों ओर से चुनाव आयोग को खुद की पार्टी को ‘असली’ मानने की अपील की गई। अखिलेश यादव जीत गए। उसके बाद वह अपने पिता का आशीर्वाद लेने मुलायम के घर गए, जो पड़ोस में ही रहते हैं।

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