rss supporter bjp leader sambit patra was not able to sing sangh prayer without seen paper - RSS की वकालत कर रहे संबित पात्रा को नहीं याद संघ की प्रार्थना, चार लाइन सुनाने के लिए देखना पड़ा कागज - Jansatta
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RSS की वकालत कर रहे संबित पात्रा को नहीं याद संघ की प्रार्थना, चार लाइन सुनाने के लिए देखना पड़ा कागज

संघ के लिए इस प्रार्थना की रचना 79 साल पहले संस्कृत के प्रोफेसर नरहरि नारायण भिड़े ने की थी। यह प्रार्थना डॉ. केवी हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर के निर्देशन में तैयार की गई थी।

संबित पात्रा बिना देखे नहीं पढ़ सके संघ की प्रार्थना। (IMAGE SOURCE-ANI)

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर काफी विवाद हुआ। टीवी कार्यक्रमों पर इस मुद्दे पर लंबी बहस आयोजित की गईं, जिनमें विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के लोगों ने अपना-अपना पक्ष रखा। ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाजपा की तरफ से संबित पात्रा ने शिरकत की और आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के शामिल होने की जोरदार वकालत की। लेकिन हैरानी की बात है कि आरएसएस की वकालत करने वाले संबित पात्रा को संघ की प्रार्थना याद ही नहीं है। टीवी कार्यक्रम के दौरान जब संबित इस प्रार्थना को पढ़ रहे थे तो उन्हें बार-बार कागज की ओर देखना पड़ा रहा था।

कार्यक्रम देखने के बाद संबित पात्रा लोगों के निशाने पर भी आ गए हैं। बता दें कि संघ की हर शाखा के समापन पर संघ प्रार्थना ‘नमस्ते सदा वत्सले’ गायी जाती है। बता दें कि संघ के लिए इस प्रार्थना की रचना 79 साल पहले संस्कृत के प्रोफेसर नरहरि नारायण भिड़े ने की थी। यह प्रार्थना डॉ. केवी हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर के निर्देशन में तैयार की गई थी। इस प्रार्थन को सार्वजनिक तौर पर पहली बार 18 मई, 1940 में नागपुर के संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम में गाया गया था। इस प्रार्थना को पहली बार संघ प्रचारक यादव राव जोशी ने गाया था।

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने को लेकर भले ही खूब विवाद हुआ, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ने विवादों के बावजूद संघ के कार्यक्रम में शिरकत की। प्रणब दा ने ना सिर्फ कार्यक्रम में शिरकत की, बल्कि संघ को अपनी एक पूरानी परंपरा तोड़ने पर भी मजबूर कर दिया। दरअसल अभी तक परंपरा रही है कि संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम में सबसे आखिर में सरसंघचालक का भाषण होता है, लेकिन इस बार मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए प्रणब मुखर्जी ने कार्यक्रम में सबसे आखिर में भाषण दिया। अपने भाषण के दौरान प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रवाद और बहुलताबाद की बात कही।

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