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फिल्म पद्मावती को लेकर पत्रकार अंजना ओम कश्यप और रोहित सरदाना में हुई बहस, जानिए क्या निकला नतीजा

रोहित सरदाना ने कहा कि संजय लीला भंसाली फिल्म के जरिए रानी पद्मावती की इज्जत को नीलाम कर रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: November 17, 2017 9:48 PM
रानी पद्मावती के रोल में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण

जाने-माने टीवी पत्रकार रोहित सरदाना और अंजना ओम कश्यप ने शुक्रवार को फिल्म ‘पद्मावती’ पर आपस में लंबी बहस की। रोहित का कहना था कि करणी सेना टीवी स्पेस पाने के लिए ‘पद्मावती’ का विरोध कर रही है। ऐसे में करणी सेना को जो चाहिए था वह उसे मिल गया है। रोहित ने कहा कि ‘पद्मावती’ के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्मों का अक्सर ही विरोध होता आया है। इस पर अंजना ने कहा कि जो भी दिमाग से फिल्में बनाएगा उसके साथ यही होगा। रोहित सरदाना ने कहा कि संजय लीला भंसाली फिल्म के जरिए रानी पद्मावती की इज्जत को नीलाम कर रहे हैं। इस पर अंजना ने सवाल किया कि क्या आपने फिल्म देखी है?

अंजना का कहना था कि लोगों ने फिल्म अभी नहीं देखी है। विरोध करने वाले केवल अफवाहों के सहारे ही इसका विरोध कर रहे हैं। इसके बाद अंजना से रोहित से सीधा सवाल किया कि क्या आप करणी सेना के विरोध को सही ठहरा रहे हैं? इस पर रोहित ने कहा कि वह करणी सेना को सही नहीं ठहरा रहे। लेकिन संजय लीला भंसाली की उस सोच का विरोध कर रहे हैं जो यह मानती है कि इस तरह की फिल्म बनाकर फ्री में पब्लिसिटी हासिल की जा सकती है।

रोहित सरदाना का कहना था कि अगर संजय ‘पद्मावती’ को रिलीज से काफी पहले ही सेंसर बोर्ड के पास भेज देते तो इस विवाद को काफी आसानी से सुलझाया जा सकता था। रोहित ने यह भी कहा कि ‘पद्मावती’ को रिलीज से पहले राजस्थान की रानियों को दिखा देना चाहिए था। इससे फिल्म के विवादित हिस्सों को निकालने में आसानी होती और विवाद कम होता। रोहित इस बहस में यह बात बार-बार कहते रहे कि फिल्म के जरिए समाज के एक खास तबके की भावनाओं का मखौल उड़ाया जा रहा है।

रोहित सरदाना ने कहा कि संजय लीला भंसाली को स्टूडियो में बैठकर इंटरव्यू देने की बजाय करणी सेना से बात करना चाहिए। वहीं, अंजना ओम कश्यप का कहना था कि विदेशों में जीसस क्राइस्ट तक पर फिल्म बन जाती है लेकिन भारत में जरा सी बात पर लोगों की भावनाएं आहत हो जाती हैं। अंजना ने कहा कि ‘पद्मावती’ पर सारा फैसला करणी सेना पर ही नहीं छोड़ देना चाहिए। बल्कि हिन्दुस्तान में करोड़ों लोग हैं और उन्हें भी फिल्म पर अपनी राय देने का अधिकार है।

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