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त्रिपुरा में पत्रकार की हत्‍या: भड़के एंकर का सवाल- आउटरेज इंडस्ट्री में सन्नाटा है, प्रेस क्‍लब नहीं जाएंगे?

बुधवार (20 सितंबर) को त्रिपुरा में टीवी पत्रकार शांतनु भूमिक की रिपोर्टिंग के दौरान कथित तौर पर हत्या कर दी गई।

टीवी चैनल जी न्यूज के पत्रकार रोहित सरदाना ने एक ट्वीट में इंडस्ट्री में पत्रकारों के साथ भेदभाव करने वालों लोगों पर निशाना साधा है। (फोटो सोर्स ट्विटर)

टीवी चैनल जी न्यूज के पत्रकार रोहित सरदाना ने एक ट्वीट में इंडस्ट्री में पत्रकारों के साथ भेदभाव करने वालों लोगों पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा, ‘त्रिपुरा में युवा पत्रकार की हत्या हो गई। ‘आउटरेज इंडस्ट्री’ में सन्नाटा है क्योंकि ये उनके गैंग का नहीं था? आज नहीं जाएंगे प्रेस क्लब?’ दरअसल बुधवार (20 सितंबर) को त्रिपुरा में टीवी पत्रकार शांतनु भौमिक की रिपोर्टिंग के दौरान कथित तौर पर हत्या कर दी गई। पत्रकार रोड ब्लॉक करने की कोशिश कर रही भाजपा समर्थक आदिवासी पार्टी स्वदेशी पीपुल्स फोरम की रिपोर्टिंग कर रहे थे। ट्वीट में पत्रकार रोहित सरदाना ने कथित तौर पर ऐसे पत्रकारों पर निशाना साधने की कोशिश की है जिन्होंने कर्नाटक में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर प्रेस क्लब में शोक सभा बुलाई थी। इस शोक सभा में एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार सहित टीवी और अखबार जगत के कई दिग्गज पत्रकार हत्या के विरोध में जमा हुए थे।

पत्रकार रोहित सरदाना के ट्वीट पर कई यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। वीनू जी लिखते हैं, ‘नफरत किसी धर्म में जायज नहीं है। हरिभक्त बनो, अंधभक्त नहीं।’ हरीश गुर्जर लिखते हैं, ‘क्या तुम जैसे पत्रकार प्रेस क्लब नहीं जाना चाहते? अब तुम चले जाओ। अभी हिंदू-मुस्लिम और रोहिंग्या का काम है तुम्हारे पास।’ आसिफ ट्वीट का जवाब देते हुए लिखते हैं, ‘वो तो भाजपा थी जो वोट बैंक की गंदी राजनीति करके आज सत्ता में है। पर जी न्यूज क्यों वोट बैंक जैसी खबर दिखाता है। समझ से परे हैं।’ अनुपम खेर लिखते हैं, ‘आप क्यों नहीं चले जाते? क्या एक दिन अपने काम से छुट्टी नहीं ले सकते?’

वरुण लिखते हैं, ‘अब स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी और देश में असहिष्णुता का गुणगान व पुरस्कार की वापसी ,मोमबत्ती के साथ रैबीज को तो कम से कम करना ही चाहिए।’ हुकुमदेव यादव लिखते हैं, ‘क्योंकि अभिसार ब्लॉग लिखने मे बिजी हैं, रवीश कन्हैया को अपने स्कूटर से एयरपोर्ट छोड़ने गए हैं और राजदीप किसी बीजेपी विरोधी किताब विमोचन मे गए हैं।’ शिवम शुल्का लिखते हैं, ‘अब रवीश कुमार की अंतरात्मा की आवाज नहीं निकलेगी। उस दिन तो भर-भर के निकल रही थी।’

 

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