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Cornelia Sorabji: डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़ बनी थीं वकील, लिखीं ये मशहूर किताबें

Cornelia Sorabji Books, Biography in Hindi: कॉर्नेलिया की 150 वीं सालगिरह थी तब ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कॉर्नेलिया सोराबजी के नाम से स्कॉलरशिप की शुरुआत की गई।

Cornelia Sorabji Books, Biography in Hindi: कॉर्नेलिया इंग्लैंड मेडिकल पढ़ने के लिए गई थीं लेकिन महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए उन्होनें वकालत पढ़ने का फैसला लिया

Cornelia Sorabji 151st Birthday: गूगल के डूडल कई बार हमारे इतिहास के बारे में ऐसी जानकारी हम तक पहुंचाते हैं जिसके बारे में इतिहास की किसी किताब में खोजने पर भी मुश्किल से नाम मिलता है। ये डूडल हमें जानकारी देते हैं उनकी जिन्होनें समाज सुधार में अपने योगदान से इतिहास में नाम दर्ज करवाया। इसी तरह आज का गूगल कॉर्नेलिया सोराबजी का 151 जन्मदिन मना रहा है। कॉर्नेलिया सोराबजी पहली महिला थी जिन्होनें ऑक्सफोर्ड से विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की और भारत और ब्रिटेन में वकालत करने वाली पहली महिला बनी। कॉर्नेलिया सोराबजी ने ऑक्सफोर्ड में जब दाखिला लिया था तब महिलाओं को वहां सिर्फ क्लास लेने, परीक्षा देने की इजाजत थी लेकिन डिग्री लेना उनके लिए प्रतिबंधित था। 1920 में महिलाओं के डिग्री लेने पर से प्रतिबंध हटाया गया था। कॉर्नेलिया सोराबजी वकालत की पढ़ाई के साथ महिलाओं के अधिकार आंदोलनों से भी जुड़ी रहीं। नारीवाद उनके खून में था, उनकी माता ने पुणे में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई स्कूलों की स्थापना की थी और उनके पिता भी कई मिशनरी स्कूलों में शिक्षा देते थे।

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कॉर्नेलिया सोराबजी इंग्लैंड मेडिकल पढ़ने के लिए गई थीं लेकिन महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए उन्होनें वकालत पढ़ने का फैसला लिया। ऑक्सफोर्ड में पढ़ते दौरान उनपर कई बार दबाव बनाया गया कि वो ईसाई धर्म अपना लें, पर जब वो कहती कि वो ईसाई धर्म से ही हैं तो कोई उनपर विश्वास नहीं करता था। इसी के कारण जब वो सिविल लॉ में स्नातक की परीक्षा दे रही थी तो लंदन के परीक्षक ने एक महिला की परीक्षा लेने से मना कर दिया और उसके बाद हॉस्टल की वॉर्डन के सामने उन्हें परीक्षा देनी पड़ी। इन सब के बाद जब महिलाओं के डिग्री लेने पर से प्रतिबंध हटा तब भी उन्हें डिग्री नहीं दी गई क्योंकि उन्होनें सभी के साथ बैठकर परीक्षा देने की अनुमति के लिए लड़ाई की थी।

कॉर्नेलिया सोराबजी के कदमों पर चलकर कई महिलाओं ने वकालत करी लेकिन उन्हें 1919 तक किसी भी कोर्ट में एक वकील के रूप में काम करने की अनुनति नहीं थी। कॉर्नेलिया सोराबजी जब 1923 में इंग्लैंड लौटी उसके बाद ही उन्हें भी वकील के तौर पर काम करने दिया गया। वकालत से हटकर उन्होनें कई किताबें लिखी थी जैसे- सन बेबीज, लव एंड लाइफ बियोंड, पुरदाह, गोल्ड मोहर आदि किताबें उनकी द्वारा रचित हैं। इसी में उनकी आत्मकथा- बिटवीन द ट्विलाइट्स भी शामिल है। पिछले वर्ष जब कॉर्नेलिया की 150 वीं सालगिरह थी तब ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने कॉर्नेलिया सोराबजी के नाम से स्कॉलरशिप की शुरुआत की गई। कॉर्नेलिया सोराबजी लॉ प्रोग्राम ऑक्सफोर्ड के भारतीय सेंटर जिसमें पोस्टडॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल प्रोग्राम चलाया जाता है। इस प्रोग्राम में भारतीय स्नातक छात्र हिस्सा लेते हैं और फिल भारत के विकास के लिए काम करते हैं। इस स्कॉलरशिप को पाने वाली पहली महिला दिव्या शर्मा चंडीगढ़, भारत से हैं।

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