षड्यंत्र करके चक्रव्यूह में फंसाना चाहती है मोदी सरकार – बोले राकेश टिकैत, कैप्टन अमरिंदर को लेकर कही यह बात

कैप्टन अमरिंदर सिंह और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल पूछा गया तो राकेश टिकैत ने कहा, हमें पार्टी से कोई मतलब नहीं है। हमारे भरोसे कोई भी पार्टी न बनाएं।

किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो – पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन के  प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज तक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए दावा किया है कि उन्हें केंद्र सरकार ने अकेले बात करने के लिए बुलाया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उन्हें षड्यंत्र कर के चक्रव्यूह में फंसाना चाहती है।

पत्रकार ने उनसे पूछा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह संकेत दे रहे हैं कि किसान आंदोलन को लेकर समझौता किया जा सकता है? राकेश टिकैत ने जवाब में कहा, मेरी इसको लेकर किसी से बातचीत नहीं हुई है। अगर कैप्टन की बात सरकार से हो रही है तो वह संयुक्त मोर्चे से भी तो बात करेंगे।

टिकैत से यूपी और पंजाब चुनाव को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘सरकार को अगर लगता है कि किसान आंदोलन का मुद्दा चुनाव में भारी पड़ेगा तो उसे समझौता करना चाहिए। हम तो 1 साल से इसका इंतजार कर रहे हैं कि इस मुद्दे पर कोई निर्णय किया जाए। पत्रकार ने पूछा ऐसा कौन सा मुद्दा ऐसा होगा। जहां आपके और सरकार के बीच रास्ते एक हो सकते हैं?

इस पर टिकैत ने कहा जब सरकार हम से पूछेगी तो हम बता देंगे। वह हमसे बात नहीं कर रही है केवल हवा में बातें मार रही है। जब उनसे पूछा गया कि कुछ किसान नेताओं ने मंत्री से मुलाकात की है? इसको धोखा बताते हुए टिकैत ने कहा, यह चक्रव्यूह रचा जा रहा है, सरकार द्वारा जाल फेंका जा रहा है। यह लोग तो अपनी पार्टी के नेताओं को भी जाल में फंसा लेते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल पूछा गया तो राकेश टिकैत ने कहा, हमें पार्टी से कोई मतलब नहीं है। अगर इनको लगता है कि यह हमारे बीच समझौता करा देंगे तो हम इनको वोट देंगे। इसको लेकर  मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि हमारे भरोसे कोई भी पार्टी न बनाएं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले 1 साल से धरने पर बैठे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार यह बिल वापस नहीं ले लेती तब तक हम आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। किसान संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठक हुई लेकिन कोई भी नतीजा नहीं निकला। बता दें कि किसान और सरकार के बीच आखिरी बार जनवरी महीने में बातचीत हुई थी।

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