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सरकारी संपत्ति का नुकसान तुम भर दो – राकेश टिकैत ने युवाओं को रिहा करने की मांग की तो लोगों ने यूं कसा तंज

किसान नेता ने सेना में भर्ती के लिए लाई गई नई योजना अग्निपथ का विरोध किया है।

rakesh tikait| bku| uttar pradesh|
राकेश टिकैत (फोटो- twitter/@RakeshTikaitBKU)

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत केंद्र सरकार द्वारा सेना भर्ती के लिए लाई गई नई योजना अग्निपथ का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि जिस तरह कृषि कानूनों को केंद्र सरकार ने वापस लिया था, उसी तरह इस योजना को भी वापस लिया जाएगा। इस योजना का विरोध कर रहे छात्रों द्वारा हिंसक प्रदर्शन भी किया गया था। जिसमें उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। इसी विषय को लेकर राकेश टिकैत ने एक ट्वीट किया तो लोग ट्रोल करने लगे।

राकेश टिकैत ने की यह मांग : किसान नेता ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक फोटो को शेयर करते हुए लिखा कि रोजगार और देश की रक्षा की खातिर भर्ती की तैयारी में जुटे युवा आंदोलनकारियों को देशद्रोही बताना कतई सही नहीं। हिंसा शांत हो चुकी, सरकार युवाओं को रिहा करे और प्राथमिकी वापस ले।

यूजर्स के रिएक्शन : सुभाष सिंह नाम के एक यूजर ने कमेंट किया कि अगर राकेश टिकैत की बात नहीं मानी गई तो धरना प्रदर्शन करने में देर नहीं लगेगी। सीआर गर्ग नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘ कभी अपने गिरेबान में भी झांक लेना चाहिए, इस देश की राजनीति की हर बात आपसे डिस्कस करेंगे। यह तो हद हो गई है।’ शत्रुघ्न जयसवाल राम के टि्वटर हैंडल से कमेंट किया गया – जेल में रहना मुफ्त, खाना मुफ्त फिर समस्या किस बात की? युवा मजे से फ्री का हॉस्टल समझ कर वहीं से तैयारी करें।

सुरेश बोहरा नाम के एक यूजर ने लिखा कि सरकारी संपत्ति का नुकसान तुम भर दो। एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने टिकैत पर तंज कसते हुए कमेंट किया – टिकैत को रोजगार मिल गया है, अब कुछ दिनों तक यही चलेगा। प्रदीप कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा कि रेलगाड़ियों को जलाना, उत्पात करना, लोगों में भय उत्पन्न करना, यह सब देश को नुकसान पहुंचाना ही होता है। ऐसे लोगों को आप जेल से बाहर देखना चाहते हैं?

अरविंद चौधरी नाम के एक यूजर पूछते हैं कि केस वापस क्यों लिया जाए भाई। सरकार से पूछकर ट्रेन जलाने गए थे क्या? अब तो बक्कल उतरेगा, सेना में तो जाने लायक यह उपद्रवी नहीं बचे हैं। दयानंद नाम के एक यूजर ने लिखा कि कल को आप सारे देश को जलाकर बोलेंगे कि सब कुछ शांत हो चुका है। यह सोच देश के लिए कितनी खतरनाक है, आप केवल लोगों के मन में डर बैठ आना चाहते हो।

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