ताज़ा खबर
 

डिबेट: ‘मियां का बाड़ा’ हो गया ‘महेश नगर’, शहजाद पूनावाला ने कहा- बुराई क्या है

एंकर ने इससे पहले सवाल किया कि क्या एक गांव के नाम में मियां शब्द आता है, इसलिए इस नाम को बदल देना चाहिए, क्या सरकार ऐसा करके इस्लामोफोबिया को बढ़ावा नहीं दे रही है? इसके जवाब में शहजाद पूनावाला ने कहा, "मान लीजिए अगर मैं आपको अतहर की जगह कुछ और कहूंगा, आप गुस्से में आ जाएंगे और कहेंगे कि मेरा नाम अतहर है और मुझे इस पर गर्व है।"

कांग्रेस के बागी नेता शहजाद पूनावाला।

राजस्थान की सरकार ने बाड़मेर जिले के एक गांव का नाम बदल दिया है। इस गांव को पहले ‘मियां का बाड़ा’ कहा जाता था, अब इस गांव को ‘महेश नगर’ कहा जाएगा। चुनावी साल में वसुंधरा सरकार की इस पहल को धार्मिक तुष्टिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर टीवी डिबेट के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार अंग्रेजों के काल में रखे गये नाम को बदल रही थी तो समझ में आ रहा था, लेकिन ऐसे नामों को बदलना सरकार की मंशा को दर्शाता है। हालांकि कांग्रेस के बागी नेता शहजाद पूनावाला ने राजस्थान सरकार के कदम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि इसमें आखिर बुराई क्या है।

अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के डिबेट में शिरकत करने आए शहजाद पूनावाला ने कहा, “देखिए शेक्सपीयर ने एक बार कहा था कि नाम में क्या रखा है, लेकिन हमलोग भारतीय परंपरा से ताल्लुक रखते हैं जहां नाम का अपना महत्व है, क्योंकि ये हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और कहीं ना कहीं हमारे पहचान को दर्शाते हैं…।” एंकर ने इससे पहले सवाल किया कि क्या एक गांव के नाम में मियां शब्द आता है, इसलिए इस नाम को बदल देना चाहिए, क्या सरकार ऐसा करके इस्लामोफोबिया को बढ़ावा नहीं दे रही है? इसके जवाब में शहजाद पूनावाला ने कहा, “मान लीजिए अगर मैं आपको अतहर की जगह कुछ और कहूंगा, आप गुस्से में आ जाएंगे और कहेंगे कि मेरा नाम अतहर है और मुझे इस पर गर्व है।”

शहजाद पूनावाला ने कहा कि जैसा कि पंचायत के सदस्य दावा करते हैं कि इस गांव का नाम महेश नगर था, और वे इसी नाम को रखना चाह रहे थे तो क्यों ना उनकी मांगें मानी जाए। उन्होंने कहा, “मैं पुणे से हूं, लेकिन हकीकत में ये पुणे नहीं पुणे नगरी है…और मुझे बहुत खुशी होगी अगर वहां के लोग एक साथ आएं और कहे कि इसका नाम पुणे नगरी होना चाहिए, पुणे तो अंग्रेजों के समय कहा जाने लगा था, हमारे सांस्कृतिक मूल्य भी यही कहते हैं…अगर हमलोग उस पुराने नाम में जाना चाहते हैं तो इसमें क्या गलती है…अगर हम अपनी विरासत को बचाना चाहते हैं, उसे फिर लाना चाहते हैं तो इससे उन लोगों को क्यों दिक्कत हो रही है जो कहते हैं कि इस देश की सांस्कृतिक विविधता को बचाया जाए, आखिर ये तो सांस्कृतिक विविधता बचाने जैसा ही है…ये तो सांस्कृतिक विविधता ही है, इसमें बुराई क्या है।” बता दें कि राजस्थान सरकार ने बाड़मेर, जालौर और झुझुंणू जिले के तीन गांवों का नाम बदला है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App