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बिना अपॉइंटमेंट अरुण जेटली के दफ्तर पहुंच गए नवजोत सिंह सिद्धू, पैर छूकर लौटे

माना जा रहा है कि सिद्धू इस माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को संदेश भी देना चाहते हैं कि वह नाखुश है।

स्थानीय निकाय और शहरी विकास मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू संसद परिसर में। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

पंजाब के स्थानीय निकाय और शहरी विकास मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू बोलने की विशेष शैली के लिए जाने जाते रहे हैं। अब वह अन्य कारणों से सुर्खियों में बने हुए हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस शामिल हुए सिद्धू बिना किसी पूर्व सूचना के वित्त मंत्री अरुण जेटली के दफ्तर में पहुंच गए। यहां उन्होंने जेटली के पैर भी छुए। दरअसल कांग्रेस नेता अरुण जेटली के जन्मदिन पर मुबारकबाद देने के लिए पहुंचे थे। हालांकि माना जा रहा है कि सिद्धू इस माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को संदेश भी देना चाहते हैं कि वह नाखुश है। इसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री को भी है। जो पूर्व में सिद्धू की पार्टी के प्रति अविश्वसनीयता जाहिर कर चुके हैं।

बता दें कि इन दिनों पंजाब सरकार फंड की कमी से जूझ रही है। यहां सरकारी स्कूलों में जरूरतमंद बच्चों को गर्म कपड़े तक नहीं दिए जा सके। पेंशनभोगियों को पेंशन देने में देरी हो रही है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, मंत्रियों, राज्य के महाधिवक्ता और अन्य लोगों के बंगलों की मरम्मत के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं। एटची मीडिया के मुताबिक पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नंदा राजशाही खर्चा कराने वालों की लिस्ट में नंबर वन पर हैं। उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर दो स्थित अपने सरकारी आवास (कोठी नंबर-50) पर कैम्प ऑफिस के रख-रखाव के लिए करीब एक करोड़ रुपये का बिल दिया है। यह सूचना सूचना के अधिकार के तहत हासिल की गई है। पंजाब के नेता विपक्ष सुखपाल खियारा ने आरटीआई के तहत ये सूचना मांगी है, जिससे ये खुलासा हुआ है।

आरटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आवास के रख-रखाव के लिए करीब 50 लाख रुपए खर्च किए जाने का बजट बनाया गया है। इनमें से 22.2 लाख रुपए के काम का टेंडर जारी हो चुका है और करीब पांच लाख रुपए का बिल ट्रेजरी में जमा हो चुका है। बता दें कि मुख्यमंत्री आवास में ही चार बंगला है। पंजाब के सबसे धनी विधायक और मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने भी अपने सरकारी आवास पर एक कैम्प ऑफिस बनवाने की पेशकश की है। इसका अनुमानित बजट 35 लाख रुपए बताया गया है। इनमें से 11.3 लाख रुपए का काम आवंटित हो चुका है और साढ़े चार लाख रुपए का बिल ट्रेजरी में जमा हो चुका है।

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