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प्रणब मुखर्जी पर पीएम नरेंद्र मोदी के ट्वीट का बेटी शर्मिष्‍ठा ने दिया बेहद खूबसूरत जवाब

नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व राष्‍ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी पर प्रणब की बेटी, शर्मिष्‍ठा ने भी प्रतिक्रिया दी है।

शर्मिष्‍ठा मुखर्जी ने कहा कि वह एक बेटी की तरफ से प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करती हैं। (PTI Photos)

भारतीय गणतंत्र के 13वें राष्‍ट्राध्‍यक्ष रहे प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल बीती 24 जुलाई, 2017 को समाप्‍त हुआ। मुखर्जी ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी साझा की है, जिसके साथ उन्‍होंने लिखा है कि ”राष्ट्रपति के तौर पर कार्यालय में मेरे आखिरी दिन मुझे पीएम नरेंद्र मोदी की चिट्ठी मिली जिसने मेरा दिल छू लिया! आप सबसे साझा कर रहा हूं।” 24 जुलाई, 2017 की तारीख वाले अपने पत्र में मोदी ने प्रणब को ‘विशिष्‍ट जीवन यात्रा के नये चरण’ के लिए शुभकामनाएं दी हैं। मोदी ने लिखा है ‘तीन साल पहले मैं एक बाहरी की तरह दिल्ली में आया। मेरे सामने बड़ी चुनौतियां थी। ऐसे समय में, आप सदैव मेरे पिता-तुल्‍य और मार्गदर्शक रहे। आपकी मेधा, ज्ञान दिशा-निर्देश और निजी स्नेह से मुझे आत्मविश्वास और शक्ति मिली।’ पीएम मोदी ने लिखा है, ”आपके अथाह ज्ञान के बारे में सबको पता है। चाहे वो राजनिति हो या अर्थशास्त्र या विदेश नीति या राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हों, मैं विभिन्न विषयों से जुड़ी आपकी अंतरदृष्टि से सदैव चकित होता रहा हूं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व राष्‍ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी पर मुखर्जी की बेटी, शर्मिष्‍ठा ने भी प्रतिक्रिया दी है। शर्मिष्‍ठा ने मोदी के ट्वीट को कोट करते हुए लिखा, ”एक बेटी की ओर से आपको धन्‍यवाद श्रीमान नरेंद्र मोदी जी। मगर भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की कार्यकत्री के तौर पर, मैं आपकी सरकार की जन-विरोधी नीतियों की आलोचना करती रहूंगी। यही लोकतंत्री की खूबसूरती है।” प्रणब खांटी कांग्रेसी नेता रहे हैं और उनकी बेटी का यह ट्वीट राजनैतिक वैमनस्‍य को कम करने की दिशा में एक सार्थक पहल कहा जा सकता है।

पूर्व राष्‍ट्रपति के लिए पत्र में पीएम मोदी ने लिखा है, ”प्रणब दा, हमारी राजनीतिक यात्रा अगल-अलग राजनीतिक दलों के माध्यम से हुई है। कई मौकों पर हमारी विचारधारा अलग रही है। हमारे जीवन अनुभव भी भिन्न हैं। मेरे पास केवल मेरे राज्य का प्रशासनिक अनुभव था जबकि आपके पास कई दशकों का राष्ट्रीय राजनीति और नीति का अनुभव था, फिर भी हम आपसी सामंजस्य के साथ काम कर पाए।”

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