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करप्शन को भी सेक्युलर और कम्युनल में बांट रहे हैं, माजिद हैदरी ने भाजपा पर साधा निशाना तो संबित पात्रा ने दिया जवाब

माजिद हैदरी ने बहस में कहा कि यह कई हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। बीजेपी ने सपोर्ट किया। घोटाले की शुरुआत बाजपेयी सरकार के समय हुई थी। कहा कि घोटाला में बीजेपी का आशीर्वाद था।

राजनीतिक विशेषज्ञ माजिद हैदरी और बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा।

जम्मू और कश्मीर में कथित रूप से 25 हजार करोड़ रुपए के रोशनी जमीन घोटाले पर टीवी चैनल न्यूज-18 के कार्यक्रम आरपार में चर्चा के दौरान राजनीतिक विश्लेषक माजिद हैदरी ने एनडीए की बाजपेयी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करप्शन को भी सेक्युलर हिंदू और सेक्युलर मुसलमान में बांट रहे हैं। कहा कि सेक्युलर हिंदू और सेक्युलर मुसलमान के बजाए कम्युनल लोगों की लिस्ट सामने लाई जाए, जिसमें बीजेपी के लोगों का नाम है।

इस पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि हिंदू-मुसलमान का नाम तो किसी ने लिया ही नहीं है। एंकर अमीश देवगन ने भी उन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “आप कमाल करते हैं। जब घोटाले में फारुक अब्दुल्ला ने जमीन खाई है तो उसका नाम राम प्रसाद नहीं हो जाएगा, जमीन जब हसीन ने खाई है तो उसका नाम हरीश नहीं हो जाएगा।”

राजनीतिक विश्लेषक माजिद हैदरी ने बहस में बोलते हुए कहा कि यह कई हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। यह तब शुरू हुआ जब नेशनल कांफ्रेंस एलांयस थी एनडीए में। बीजेपी ने सपोर्ट किया। घोटाले की शुरुआत बाजपेयी सरकार के समय हुई थी। कहा कि पीडीपी ने घोटाला किया, नेशनल कांफ्रेंस ने घोटाला किया, कांग्रेस ने घोटाला किया तो इसमें बीजेपी का आशीर्वाद था। अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार का आशीर्वाद था। इस पर भी बात की जाए। आरएसएस पर भी बात की जाए।

इस पर टोकते हुए बीजेपी के संबित पात्रा ने तंज करते हुए कहा, “अच्छा तो गुलाम नबी आजाद को हमने आशीर्वाद दिया।” कहा कि कम्यूनल लोगों की लिस्ट दिखाइए, जिसमें कम्युनल लोगों के नाम शामिल है। जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में जमीन हड़पी है। उन्होंने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के सगे संबंधियों के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया। कहा कि इसकी जांच की जानी चाहिए। इस पर बात होनी चाहिए।

रोशनी घोटाला क्या है? दरअसल सरकार ने प्रभावशाली लोगों द्वारा सार्वजनिक जमीन के अतिक्रमण को नियमित करने के लिए रोशनी एक्ट बनाया था। इस अधिनियम के तहत यह प्रस्तावित किया गया था कि वर्ष 1990 तक प्रचलित बाजार दर के बराबर लागत के भुगतान पर, 1990 तक अनाधिकृत रूप से राज्य की भूमि पर कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को मालिकाना हक दिया जाए क्योंकि इन जमीनों को वापस ले पाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा था। 1999 के पहले जो सरकारी जमीन थी उसे गरीब तबके के लोगों को विधिपूर्वक जमीन उपलब्ध कराने के लिए रोशनी एक्ट बनाया गया था। अब यह कहा जा रहा है कि इस एक्ट की आड़ में फारूक अब्दुल्ला ने भी जमीन हथिया ली। उनका जम्मू में आलीशान बंगला है। 1998 में उन्होंने तीन अलग अलग लोगों से तीन कैनाल ज़मीन ख़रीद ली। बाद में जंगल के 7 कैनाल ज़मीन पर धीरे-धीरे क़ब्ज़ा किया। अब इसी ज़मीन पर उनका घर है जिसे अवैध बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि फारुख अब्दुल्ला की पार्टी का श्रीनगर में जो दफ्तर है वो भी अवैध है।

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