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पीएम ने दिया यह नया नारा, AAP नेता बोले – महान लोगों की बराबरी करने की लालसा खत्म नहीं होती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए नारे पर नरेश बालियान ने कमेंट किया तो आम सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी।

पीएम ने दिया यह नया नारा, AAP नेता बोले – महान लोगों की बराबरी करने की लालसा खत्म नहीं होती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स – सोशल मीडिया)

आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 75 साल की हमारी यह यात्रा सुख दुख से भरी रही लेकिन हमारे देश के लोगों ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। पीएम ने जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान के साथ जय अनुसंधान का नारा दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया नया नारा

प्रधानमंत्री ने 75 वीं वर्षगांठ पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अटल बिहारी वाजपेई को स्मरण करते हुए कहा कि, ‘लाल बहादुर शास्त्री ने देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जय जवान जय किसान का नारा दिया था, बाद में अटल बिहारी बाजपेई ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा। अब देश की जरूरतों को देखते हुए इसमें नई चीज को जोड़ना आवश्यक है इसलिए अब जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान की जरूरत है।’

आम आदमी पार्टी के नेता ने किया कटाक्ष

आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बालियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस नए नारे पर कटाक्ष करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘महान लोगों की बराबरी करने की इनकी लालसा कभी खत्म नहीं होगी, विज्ञान में अनुसंधान ही करते हैं। क्लाउड से रडार छुपाने वाला नहीं।’ प्रधानमंत्री के बयान पर आम सोशल मीडिया यूज़र भी कई तरह के कमेंट कर रहे हैं।

लोगों की प्रतिक्रियाएं

पंकज सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर सवाल करते हैं कि फिर जय विज्ञान का क्या मतलब हुआ? साइंस में तो इनोवेशन और रिसर्च का ही काम है? अमित नाम के एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा – इस तरह पहला अनुसंधान प्रोजेक्ट काले जादू पर किया जाएगा। आदर्श नाम के ट्विटर यूजर कमेंट करते हैं कि अरे जय विज्ञान में अनुसंधान भी आ गया है। बिना अनुसंधान के क्या विज्ञान? फिर तो वो आस्था और भक्ति टाइप हो जाएगा।

योगेश नाम के एक ट्विटर यूजर द्वारा लिखा गया कि जितनी भी मर्जी, उतना नारा दे दिया जाए। लेकिन भाषण के बाद जनता महंगाई और बेरोजगारी पर ही सवाल करेगी। कुलदीप यादव नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘प्रभु, विज्ञान में अनुसंधान ही किया जाता है, अपना नाम दर्ज कराने के लिए कुछ भी मत बोल दीजिए।’ अनुभव शुक्ला नाम के एक यूजर ने पूछा – अनुसंधान विज्ञान से कब से अलग हो गया है, हमें तो सालों से इस बारे में जानकारी ही नहीं थी।

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