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क्या मोदी ने कहा-पंडित नेहरू बीजेपी से डरते थे? सोशल मीडिया पर पीएम को ट्रोल करने की कोशिश

उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू जनसंघ से डरते थे और अब कांग्रेस बीजेपी से। इस बात को लेकर सोशल मीडिया के एक धड़े ने आरोप लगाया कि जिस वक्त बीजेपी थी ही नहीं, उस वक्त पंडित नेहरू के उससे डरने का सवाल ही कहां पैदा होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात में एक जनसभा में कांग्रेस और नेहरू गांधी परिवार पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी और उसके नेता गुजरात और गुजरातियों को नापसंद करते हैं। मोदी ने कहा कि वह इनकी ‘आंखों में चुभते’ हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को विकास एवं गुजरात विरोधी करार देते हुए मोदी ने कहा, ‘भाजपा के लिये चुनाव विकासवाद की जंग है, कांग्रेस के लिये वंशवाद की जंग है और मुझे पूरा विश्वास है कि गुजरात में विकासवाद जीतने वाला है और वंशवाद हारने वाला है।’ उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू जनसंघ से डरते थे और अब कांग्रेस बीजेपी से। इस बात को लेकर सोशल मीडिया का एक धड़ा मोदी को ट्रोल करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस वक्त बीजेपी थी ही नहीं, उस वक्त पंडित नेहरू के उससे डरने का सवाल ही कहां पैदा होता है। वहीं, बीजेपी समर्थकों का कहना था कि मोदी ने जनसंघ का नाम लिया, बीजेपी का नहीं।

मोदी ने क्या कहा
मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, ‘ज्योतिसंघ अहमदाबाद में एक संस्था चल रही है। 50-60 के दशक में पंडित नेहरू ज्योतिसंघ के कार्यक्रम में आए थे। और मैंने सुना है, लोग हमें बताते थे, हम तो उस समय बालक थे तो पता नहीं क्या हुआ? लेकिन जो बाद में सुना था, वो कहते हैं कि ज्योति संघ के कार्यक्रम में पंडित नेहरू ज्योति संघ बोलना भूल जाते थे और बार-बार जनसंघ बोलते थे। बार-बार जनसंघ…इनके जेहन में उस समय, जबकि जनसंघ एक बालक था, अभी तो पालने में झूल रहा था, तब भी पंडित नेहरू कांप रहे थे जी। आज भारतीय जनता पार्टी से इनका कांपना बहुत स्वभाविक है।’

सोशल मीडिया की राय
सोशल मीडिया का कहना था कि मोदी का दावा झूठ है क्योंकि पंडित नेहरू के वक्त बीजेपी थी ही नहीं। कई ट्विटर यूजर्स ने ‘बदतमीज विकास’ के हैशटैग से ट्वीट किए। कई यूजर्स ने लिखा कि पं. नेहरू 1964 में चल बसे थे और बीजेपी 1980 में बनी तो ये बात कहने से पहले पीएम मोदी को अपनी पार्टी का इतिहास पढ़ लेना चाहिए।

इसके अलावा अपने भाषण में पाटीदार आंदोलन के बाद पटेल समुदाय के एक वर्ग की नाराजगी को समझते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ इस पार्टी ने, इस परिवार ने किस तरह का व्यवहार किया, इतिहास इसका गवाह है। मैं इसे दोहरना नहीं चाहता । सरदार पटेल की पुत्री मणिबेन और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ किस प्रकार का व्यवहार इस पार्टी ने किया, यह सभी के सामने है। इनको हर प्रकार से नेस्तनाबूद करने का काम किया । गुजरात उनको (कांग्रेस और उसके नेतृत्व) पसंद ही नहीं था । उसने बाबू भाई पटेल के नेतृत्व वाली सरकार को तोड़ने का काम किया ।