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एयरफोर्स ऑफिसर से कहीं और देखते हुए हाथ मिलाने पर ट्रोल हुए पीएम, पूरी बात जानकर चुप हुए लोग

असम से लौटते समय हवाई जाहज के सामने की एक पिक्चर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पिक्चर में पीएम एक एयरफोर्स अधिकारी से हाथ मिला रहे हैं लेकिन देख सामने रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

देश का असम समेत पूर्वोत्तर का हिस्सा भयानक बाढ़ की चपेट में है। अकेले असम में अभी तक 80 लोगों के मरने की जानकारी सामने आ चुकी है। ऐसे में पीएम मोदी ने मंगलवार को स्वयं असम जाकर वहां की स्थिति की जानकारी ली। पीएम ने राज्य के लिए 2350 करोड़ रुपए की सहायदा राशी भी जारी की है। इसके बाद पीएम असम से वापस दिल्ली लौट आए। उनके लौटते समय हवाई जाहज के सामने की एक पिक्चर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पिक्चर में पीएम एक एयरफोर्स अधिकारी से हाथ मिला रहे हैं लेकिन देख सामने रहे हैं। उनके इस अंदाज पर सवाल खड़े किए गए। हालांकि बाद में जब इस फ्रेम से एक फ्रेम पहली की तस्वीर स्पष्ट हुई तो बास स्पष्ट हो गई। खुद न्यूज एजेंसी एएनआई की एडिटर स्मिता ने ये तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की।

वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बाढ़ प्रभावित पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 2,350 करोड़ रुपये की राशि ‘‘कम’’बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की भाजपा सरकार ने नरेंद्र मोदी के समक्ष राज्य की वास्तविक स्थिति नहीं रखी। पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा, ‘‘गंगा का कायाकल्प करने की परियोजना के लिए 20,000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई, तब समूचे पूर्वोत्तर के लिए सिर्फ 2,350 करोड़ रुपये ही क्यों।’’ उन्होंने ब्रह्मपुत्र में उफान के चलते आई बाढ़ से निपटने के लिए 50,000 करोड़ रुपये की मांग की। प्रधानमंत्री ने कल बाढ़ प्रभावित सभी पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 2,350 करोड़ रुपये के पैकेज और बाढ़ प्रभावित असम के लिए 250 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने की घोषणा की थी। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में बाढ़ से मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने की भी घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मोदी ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर राज्यों से उन्हें सहानुभूति है, तब फिर बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए कम राशि क्यों रखी गई। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वह (मोदी) क्षेत्र के लिए केवल घड़ियाली आंसू बहाते हैं। पांच राज्यों के लिए वह केवल पांच घंटे रुके। वह प्रभावित लोगों तक क्यों नहीं गए और बाढ़ पीड़तों के ‘मन की बात’ क्यों नहीं सुनी।’’

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