आईवियर रिटेल कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) के नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया। यह मामला कंपनी के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए प्रयोग किए जाने वाले कथित दस्तावेज से जुड़ा हुआ है। इसमें ‘ग्रूमिंग और यूनिफॉर्म से जुड़े नियम’ बताए गए हैं। इस गाइड के मुताबिक कंपनी अपने कर्मचारियों को हिजाब की अनुमति देती है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा जैसे चीजों पर रोक लगाती है। अब इस पर पीयूष बंसल ने सफाई दी है…
लोगों ने X (Twitter) पर गाइडबुक से आपत्तिजनक नियमों का स्क्रीनशॉट लिया और पोस्ट किया। शेफाली वैद्या नाम की यूजर ने 15 अप्रैल को पोस्ट कर लिखा, ‘तो मैंने इसकी पुष्टि कर ली है, यह असली है। पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से यही कहते हैं: हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी/तिलक/कलावा नहीं और यह बात लेंसकार्ट जैसी कंपनी के लिए है, जो हिंदू-बहुल भारत में मौजूद है, जहां ज्यादातर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं! इस पर आपकी क्या राय है? यह लेंसकार्ट की कर्मचारियों के लिए बनी स्टाइल गाइड का 11वां पेज है।’
पीयूष बंसल ने दी सफाई
पीयूष बंसल ने X (Twitter) पर लिखा, ‘मैंने देखा है कि लेंसकार्ट के बारे में एक गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है। मैं सीधे तौर पर कहना चाहता हूं कि यह डॉक्यूमेंट हमारी मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दिखाता है। हमारी पॉलिसी में किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है, जिसमें बिंदी और तिलक भी शामिल हैं और हम अपनी गाइडलाइंस की नियमित रूप से समीक्षा करते रहते हैं।’
उन्होंने लिखा, ‘हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी पिछले कुछ सालों में बदली है और इसके पुराने वर्शन यह नहीं दिखाते कि आज हम कौन हैं। इस स्थिति से जो भी कन्फ्यूजन और चिंता पैदा हुई है, उसके लिए हम माफी चाहते हैं। एक कंपनी के तौर पर, हम लगातार सीखते और आगे बढ़ते रहते हैं। हमारी भाषा या पॉलिसी में जो भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा।
उन्होंने आगे लिखा, पूरे भारत में हमारी टीम के हजारों सदस्य हैं जो हर दिन हमारे स्टोर्स पर गर्व के साथ अपने धर्म और संस्कृति को अपनाते हैं। वे ही लेंसकार्ट हैं। लेंसकार्ट को भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाया गया था। हमारे लोग जो भी प्रतीक और परंपराएं अपनाते हैं, वे एक कंपनी के तौर पर हमारी पहचान का ही हिस्सा हैं। मैं कभी भी इस पहचान पर कोई आंच नहीं आने दूंगा।
पीयूष बंसल ने एक अन्य X (Twitter) पोस्ट पर लिखा, ‘मैंने आपकी चिंताओं को सुना है और मैं इस मामले में आपकी भावनाओं को समझता हूं। मैं अपनी पिछली पोस्ट में कुछ और बातें जोड़ना चाहता हूं। अभी जो डॉक्यूमेंट सर्कुलेट हो रहा है, वह एक पुराना इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है। यह कोई HR पॉलिसी नहीं है। फिर भी, उसमें बिंदी/तिलक के बारे में एक गलत लाइन लिखी थी, जिसे कभी भी नहीं लिखा जाना चाहिए था और जो हमारे मूल्यों या हमारी असल कार्यप्रणाली को नहीं दिखाती है। जब 17 फरवरी को हमें इस बारे में पता चला (जो कि यह मामला पब्लिक में आने से काफी पहले की बात है) हमने तुरंत उसे हटा दिया।’
उन्होंने लिखा, ‘लेकिन मुझे इस गलती को पहले ही पकड़ लेना चाहिए था। एक फाउंडर और CEO होने के नाते, ऐसी गलतियों की जिम्मेदारी मेरी है। मैंने अपनी टीम से कहा है कि वे ऐसी सभी चीज़ों की और भी सख्ती से समीक्षा करें और मैं खुद इस बात का ध्यान रखूंगा कि भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो। हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह चीज हमारे ट्रेनिंग कंटेंट में कैसे शामिल हो गई।
मैं यह बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूँ। लेंसकार्ट किसी भी तरह की सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं लगाता है और न ही कभी लगाएगा। इसमें बिंदी, तिलक या आस्था से जुड़े ऐसे ही दूसरे प्रतीक शामिल हैं। हमारी टीम के सदस्य हमेशा से ही अपनी आस्था को गर्व के साथ व्यक्त करने के लिए आजाद रहे हैं और आगे भी हमेशा आजाद रहेंगे।
मैं उन सभी लोगों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हू्ं जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया। आपकी आवाज़ हमें बेहतर बनने में मदद करती है और हम जिन मूल्यों के लिए खड़े हैं, उन पर कायम रहने की प्रेरणा देती है।’
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माता वैष्णो देवी धाम में बीते शनिवार को कुछ ऐसा हुई, जिससे इस धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की आस्था और मजबूत हो गई। यहां बहन को उसका 50 दिन पहले खोया हुआ भाई मिल गया। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले अभिषेक मिश्रा बीते 20 फरवरी को बिना किसी को बताए घर से निकल गए थे। तब से परिवार को उनकी तलाश थी। यहां पढ़ें पूरी खबर…
