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नेहरू को लेनी चाहिए थी महात्‍मा गांधी की हत्‍या की नैतिक जिम्‍मेदारी, टीवी डिबेट में बोले RSS विचारक

मुंबई आधारित एक एनजीओ अभिनव भारत ट्रस्ट के शोधकर्ता और ट्रस्टी पंकज फडनिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गांधी जी की हत्या की फाइल दोबारा खुलवाने और जांच कराने की मांग की है।
इंडिया टुडे चैनल पर शुक्रवार को लाइव डिबेट में आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को महात्मा गांधी की हत्या की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के करीब 70 साल बाद अब फिर से राजनीतिक जगत में उनके हत्यारों को लेकर बहस छिड़ गई है। मुंबई आधारित एक एनजीओ अभिनव भारत ट्रस्ट के शोधकर्ता और ट्रस्टी पंकज फडनिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गांधी जी की हत्या की फाइल दोबारा खुलवाने और जांच कराने की मांग की है। शुक्रवार (06 अक्टूबर) को कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई। इधर, मीडिया में भी इस बात पर बहस हो रही है कि क्या गांधी जी की हत्या की फाइल दोबारा खोले जाने का कोई औचित्य है?

इस बीच इंडिया टुडे चैनल पर शुक्रवार को लाइव डिबेट में आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को महात्मा गांधी की हत्या की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी सिर्फ तुषार गांधी या उनके परिवार की प्रॉपर्टी नहीं हैं। अगर कोई महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ी कोई जानकारी लेना चाहता है तो यह उसका मौलिक अधिकार है।” सिन्हा ने कहा, “गांधी जी की हत्या पर दो कमीशन और दो फैसले आ चुके लेकिन किसी ने भी उनकी सुरक्षा से संबंधित सवालों पर कोई फैसला नहीं दिया।”

उन्होंने कहा कि प्रमुख कांग्रेसी नेता राजगोपालाचारी ने भी अपनी किताब में लिखा है कि गांधी जी की सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। उनके सचिव ने भी यह जानकारी दी थी। अगर गांधी जी को सुरक्षा दी गई होती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। इसलिए पंडित नेहरू को महात्मा गांधी की हत्या की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।

बता दें कि याचिकाकर्ता ने गांधी जी की मौत को सबसे बड़ा कवर-अप बताते हुए केस की दोबारा जांच की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर आज (शुक्रवार, 06 अक्टूबर को) सुनवाई की और याचिकाकर्ता से कई सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि मामले में दो दोषियों की मौत हो चुकी है और केस से जुड़े तमाम लोग मर चुके हैं। ऐसे में इस केस को दोबारा खोलने का क्या कोई कानूनी औचित्य है? कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या इस मामले में कोई नया सबूत है? अब कोर्ट 30 अक्टूबर को महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराई जाय या नहीं, इस पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने पूर्व एडिशनल सोलिसिटर जनरल अमरेंद्र शरण को मामले में एमिकस क्यूरी बनाया है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि अगर दोबारा हत्याकांड की जांच हुई तो गांधी जी की हत्या की साजिश का बड़ा खुलासा हो सकता है।

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