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रवीश कुमार का इशारों में मोदी पर तंज? बोले- बारात और गणतंत्र समारोह में फर्क, पगड़ी पहन रंगीन मत बनाइए

Padmavati Movie Release: रवीश लिखते हैं, 'ये मुख्यमंत्री थर्ड क्लास न होते तो ये संविधान की रक्षा में 25 जनवरी को खड़े नज़र आते। एक फिल्म के बहाने जो लोग उत्पात मचाते रहे और जो लोग उस उत्पात के बहाने सांप्रदायिक गौरव में चुपचाप ढलते रहे उन सबने संविधान की आत्मा को धोखा दिया है।'

पत्रकार रवीश कुमार एक कार्यक्रम में बोलते हुए (फोटो-Facebook/@RavishkaPage) 26 जनवरी के मौके पर अमर जवान ज्योति पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो-Twitter/@narendramodi)

फिल्म पद्मावत पर हुए हंगामे और देश के लोकतंत्र की वर्तमान हालत पर पत्रकार रवीश कुमार ने टिप्पणी की है। रवीश कुमार ने इसी बहाने पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है कि हमें 26 जनवरी का जश्न मनाते रहना है ताकि हम सभी को संविधान के आदर्श याद रहें। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘आज फिर से हम कमज़ोर होने लगे हैं। चुप रहने लगे हैं। अफसोस इस वक्त भारत में थर्ड क्लास नेता मुख्यमंत्री बन गए हैं। यकीनन थर्ड क्लास हैं।’ आगे रवीश लिखते हैं, ‘ये मुख्यमंत्री थर्ड क्लास न होते तो ये संविधान की रक्षा में 25 जनवरी को खड़े नज़र आते। एक फिल्म के बहाने जो लोग उत्पात मचाते रहे और जो लोग उस उत्पात के बहाने सांप्रदायिक गौरव में चुपचाप ढलते रहे उन सबने संविधान की आत्मा को धोखा दिया है।’ रवीश कुमार ने भविष्य के लिए उम्मीद जताई है और लिखा है, ‘कोई नौजवान आएगा जो संवैधानिक आदर्शों से लैस होगा और संवैधानिक व्यवस्था की सर्वोच्चता को कायम करेगा।’

रवीश कुमार ने संविधान पर हमले का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है, ‘संविधान पर हमले होते रहेंगे मगर स्याही छिड़क देने से किताब नहीं मिट जाती है। संविधान की करोड़ों प्रतियां हैं। आप किसी भी प्रति को उठा लीजिए।’ रवीश पद्मावत की ओर इशारा करते हैं, गणतंत्र दिवस समारोह की बात करते हैं और लिखते हैं, ‘अपनी कमियों पर भी उसी साहस से बात कीजिए जिस साहस से हम अपने गौरव की बात करते हैं। वो गौरव जाति का नहीं होना चाहिए. संविधान से मिली व्यवस्था के कारण हम जो भी हासिल करते हैं, उसका गौरव गान कीजिए। पगड़ी पहनकर रंगीन मत बनाइये। सब कुछ फिल्म का सेट नहीं है। शादी के समय बारात के स्वागत और गणतंत्र के समारोह में फर्क कीजिए। हाथ में संविधान की किताब लेकर आइये।’

रवीश कहते हैं कि क्या हम आज़ाद जांच एजेंसी, आज़ाद पुलिस व्यवस्था, आजा़द न्याय व्यवस्था की भी झांकी निकाल सकते हैं? वह आगे अपनी राय देते हैं, ‘फिलहाल नहीं। मगर इन्हीं व्यवस्थाओं में ऐसे आज़ाद लोग हैं जो अपने अकेले दम पर संविधान की हिफाज़त में खड़े रहते हैं। वैसे लोगों का आज के दिन स्वागत कीजिए।’

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